लखनऊ। राजधानी की गंगा-जमुनी तहजीब यहां की रामलीलाओं में नजर आती है। आलमबाग में होने वाली रेलवे रामलीला दशहरा कमेटी की 73 साल पुरानी रामलीला में उर्दू में संवाद होते हैं।
निर्देशक वीरेंद्र शर्मा बताते हैं कि वह पेशे से इंजीनियर हैं जो दस दिन की छुट्टी लेकर पूरी रामलीला को निर्देशित करते हैं। आलमबाग के एलडीए कॉलोनी के रहने वाले वीरेंद्र ने बताया कि वह लंबे समय से रावण का पात्र निभाते आ रहे हैं। लीलामंचन के डॉयलाग उर्दू में इसलिए रखे ताकि समाज में सकारात्मक संदेश दे सकें।
वहीं दूसरी ओर भरत व परशुराम का पात्र निभाने वाले मृदुल मिश्र बताते हैं कि पूरे समूह में 60 लोग हैं। हम लोगों को यह नहीं मालूम कि कितने साल पहले यह रामलीला लिखी गई लेकिन इसमें थोड़ा सा हिंदी का प्रयोग तो बाकी जगह उर्दू में संवाद हैं। हम सभी करीब दो महीने तक अभ्यास करते हैं।