फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lucknow News: खराब जीवनशैली बच्चेदानी के कैंसर की बड़ी वजह

विज्ञापन
विज्ञापन
लखनऊ। बहुत ज्यादा जंक फूड का सेवन, तनाव और व्यायाम न करना बच्चेदानी के कैंसर की बड़ी वजह बन सकते हैं। एसोसिएशन ऑफ गायनी आंकोलॉजिस्ट ऑफ इंडिया की 10वीं वार्षिक काॅन्फ्रेंस के दौरान दिल्ली की डॉ. श्वेता गिरि ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खराब जीवनशैली की वजह से ही शहरी क्षेत्र में बच्चेदानी के कैंसर के मामले ग्रामीण क्षेत्र के मुकाबले कहीं ज्यादा हैं। कॉन्फ्रेंस का आयोजन केजीएमयू के कलाम सेंटर में किया गया।
विज्ञापन

डॉ. गिरि ने बताया कि माहवारी से निवृत्त होने की आयु में अगर इसके अनियमित होने, ब्लीडिंग और सफेदस्राव की समस्या हो तो इसे गंभीरता से लें। यह बच्चेदानी के कैंसर की वजह से हो सकती है। इसका सबसे बड़ा कारण खराब जीवनशैली है। मोटापे की वजह से भी यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। व्यायाम करके और जीवनशैली में सुधार करके इससे बचा जा सकता है। बच्चेदानी का कैंसर होने के बाद जल्द जानकारी होने पर दूरबीन विधि से इसका ऑपरेशन संभव हो है। क्वीनमेरी की विभागाध्यक्ष डॉ. एसपी जायसवार ने कहा कि कैंसर को लेकर जागरूकता पहले से बढ़ी है। काफी महिलाएं कैंसर की शुरुआत अवस्था में इलाज के लिए आ रही हैं। इससे पहले कुलपति डॉ. बिपिन पुरी ने कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में क्वीनमेरी की डॉ. निशा सिंह, डॉ. सुजाता देव, डॉ. रेखा सचान, डॉ. रेनू समेत अन्य डॉक्टर मौजूद रहीं।



फैलोपियन ट्यूब निकालकर हो सकता है ओवेरियन कैंसर से बचाव

आगरा मेडिकल कॉलेज की डॉ. सरोज सिंह ने बताया कि 25 हजार महिलाओं पर हुए अध्ययन में यह सामने आया है कि जिन महिलाओं की फैलोपियन ट्यूब निकल जाती है, उनको ओवेरियन कैंसर की समस्या नहीं होती है। इसलिए मासिक धर्म से निवृत्त होने के बाद अगर किसी सर्जरी की स्थिति आती है तो फैलोपियन ट्यूब को बांधने के बजाय उसे निकालना बेहतर विकल्प होता है। इससे दोबारा बीमारी के पनपने का खतरा कम हो जाता है। ओवेरियन कैंसर के मामले में महिला को मासिक धर्म निवृत्ति के बाद पेट में भारीपन, सूजन जैसे लक्षण नजर आते हैं।
विज्ञापन




रेयर कैंसर में काम नहीं करता टीकाकरण

जयपुर की डॉ. रानू पटनी ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर एचपीवी वायरस की वजह से होता है, इसलिए सर्वाइकल कैंसर की वैक्सीन तय समय पर लगवानी चाहिए। वहीं इसके रेयर कैंसर प्रकार में यह वैक्सीन कारगर नहीं है। सर्वाइकल कैंसर के कुल मामलों में तीन से पांच प्रतिशत रेयर कैंसर होते हैं। इसमें महिलाएं अंतिम स्टेज में अस्पताल आती हैं। इसकी वजह से 30 फीसदी के करीब ही सवाईवल होता है। इसलिए इस कैंसर के प्रति ज्यादा जागरूकता की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें