लखनऊ। मोहनलालगंज तहसील के 11 गांवों की जमीन के अधिग्रहण को चुनौती देकर जनहित याचिका (पीआईएल) हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में दाखिल की गई है। कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार, आवास विकास परिषद एवं अन्य पक्षकारों को आपत्तियां (अगर कोई हों तो) दाखिल करने का मौका देकर याचिका को 15 अक्तूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ल की खंडपीठ ने यह आदेश मोतीलाल यादव की जनहित याचिका पर दिया। याची ने मोहनलालगंज के 11 गांवों चांद सराय, कासिमपुर बिरुहा, हबुआपुर, मुअज्जम नगर, सठवारा, सिद्धपुरा, भटवारा, पहाड़ नगर टिकरिया, कबीरपुर, मघुवा एवं बेली की जमीन को अधिग्रहीत करने के आदेश को चुनौती दी है। साथ ही आवास विकास परिषद की ओर से इन गांवों की जमीन का बैनामा, अंतरण समेत इकरारनामे आदि के पंजीकरण पर रोक लगाने के 16 अगस्त 2024 के आदेश को रद्द करने का आग्रह किया है। साथ ही जमीन के बैनामे और अंतरण की छूट दिए जाने की गुजारिश भी की है।
याची का कहना है कि इन गांवों की जमीन की अधिग्रहण प्रक्रिया वर्ष 2015 के निर्धारित डीएम सर्किल रेट के आधार पर शुरू की गई है। अब करीब नौ साल बाद जमीन की कीमत काफी बढ़ गई है। इससे भूस्वामियों को जमीन अधिग्रहण का मुआवजा मिलने में काफी नुकसान होगा। वर्ष 2015 से जमीन का सरकारी मूल्य बढ़ाकर निर्धारित ही नहीं किया गया। ऐसे में भू स्वामियों को बहुत कम मुआवजा मिलने की आशंका है। याची ने मामले में संशोधन अर्जी दाखिल कर यह दलील दी कि जमीन का मौजूदा सरकारी रेट तय कर अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। इसके विरोध में किसानों के प्रदर्शन समेत कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों के भूस्वामियों को दिए जा रहे समर्थन का भी हवाला दिया। याची ने याचिका के साथ मामले में अमर उजाला में प्रकाशित खबरों को भी लगाया है।