इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बृहस्पतिवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित कर लिया। कोर्ट ने कहा कि पक्षकारों के वकील अपनी लिखित बहस 10 जनवरी तक दाखिल कर सकते हैं।
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान की एकल पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। यह मामला वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान अमेठी की एक जनसभा में भाजपा व कांग्रेस के खिलाफ कथित आपत्तिजनक भाषण देकर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप का है। जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 125 के तहत यह केस अमेठी के मुसाफिरखाना थाने में दर्ज कराया गया था। जिसमें 9 जुलाई 2014 को निचली अदालत में आरोप पत्र दाखिल हुआ था। इस केस में केजरीवाल ने निचली अदालत में आरोपमुक्त करने की डिस्चार्ज अर्जी पेश की थी। जिसे 4 अगस्त 2022 को अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ उन्होनें सुल्तानपुर जिले की सत्र अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की। जिसे सत्र न्यायाधीश ने 20 अक्तूबर 2022 को खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ केजरीवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निचली अदालतों के इन दोनों आदेशों को चुनौती दी है।
याची के वरिष्ठ अधिवक्ता एचजीएस परिहार का कहना था कि केजरीवाल के खिलाफ कथित भाषण से चुनाव आचार संहिता का कोई केस नहीं बनता है। ऐसे में निचली अदालतों के आदेश कानून की मंशा की खिलाफ हैं और याची को आरोप मुक्त किया जाना चाहिए। उधर, सरकारी वकीलों राजेश कुमार सिंह व आलोक सरन ने याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि मामले में आरोप पत्र दाखिल हो चुका है। ऐसे में केस की सामग्री से याची आरोपमुक्त करने योग्य नहीं है। कोर्ट ने याचिका पर वकीलों की बहस सुनने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया।