उत्तर प्रदेश के आयुष कॉलेजों में दाखिले में हुई हेराफेरी के मामले में सीसीटीवी फुटेज से भी सुराग लगाने का प्रयास हो रहा है। विभागीय जांच में लगी कमेटी इस फुटेज के जरिए काउंसिलिंग स्थल की गतिविधियों की पड़ताल करेगी।
सूत्रों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज के जरिए देखा जाएगा कि काउंसिलिंग के वक्त कौन-कौन कर्मचारी कार्यरत थे। वहीं काउंसिलिंग में लगी एजेंसी के कर्मचारियों की भी फुटेज से शिनाख्त हो सकेगी। फुटेज की एक कॉपी एसटीएफ को भी दी जाएगी। इसके जरिए यह भी जांच जाएगा कि काउंसिलिंग का जिम्मा लेने वाली एजेंसी ने उसकी कंपनी में कार्यरत कर्मचारियों को ही मौके पर लगा रखा था या फर्जीवाड़ा करने वाले लोग ही कर्मचारी के भेष में कार्य कर रहे थे। दूसरी तरफ विभाग के जिन कर्मचारियों की ड्यूटी काउंसिलिंग स्थल पर लगी थी, वह मौके पर कार्यरत थे या नहीं, की भी जांच हो सकेगी। गौरतलब है कि विभाग के आला अधिकारियों ने काउंसिलिंग स्थल को पहले दिन ही सीज करा दिया था। सभी दस्तावेज और कंप्यूटर भी सीज किए गए हैं।
विभागीय कमेटी ने भी कसा शिकंजा
आयुर्वेद विभाग के निलंबित निदेशक डॉ. एसएन सिंह पर विभागीय जांच कमेटी ने शिकंजा भी कस दिया है। कमेटी ने दाखिले की पूरी प्रक्रिया समझी और जानकारी जुटाई। वहीं काउंसिलिंग के विभिन्न पहलुओं के बारे में अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की। जांच में पता चला कि अधिकारियों के कई नातेदार निदेशालय में तैनात हैं।
दाखिले का कॉलेजवार मांगा ब्योरा
आयुष कॉलेजों के सभी प्रधानाचार्य से दाखिला लेने वाले छात्रों के बारे में नए सिरे से ब्योरा मांगा गया है। इस बाबत एक प्रारूप जारी किया गया है। प्रधानाचार्य को यह भर कर देना है कि संदिग्ध छात्रों में कितने ने दाखिला लिया और कितने नहीं आ रहे हैं। प्रदेश के आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथिक कॉलेजों में नीट 2021 के तहत हुए दाखिले में 891 संदिग्ध पाए गए हैं। पहले इन सभी को निलंबित किया गया और अब प्रधानाचार्य से उनका विवरण मांगा गया है। कमेटी ने दाखिले के वक्त दी गई फीस रसीद और आवंटन पत्र समेत दूसरे दस्तावेज मांगे हैं।