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तराशे गए पत्थर एक साथ परिसर पहुंचाए जाएंगे

Wed, 09 Sep 2020 06:36 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
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अयोध्या, राम मंदिर
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श्रीराम जन्मभूमि न्यास कार्यशाला में तराश कर रखे हुए पत्थरों को अब श्रीराम जन्मभूमि परिसर में पहुंचाने की तैयारी भी तेज हो गयी है। इसके लिए रास्ते की मैपिंग की जा चुकी है। कार्यशाला से रामजन्मभूमि परिसर में पत्थरों की शिफ्टिंग का प्लान बनाया जा चुका है। सभी पत्थर एक साथ परिसर में पहुंचाए जाएंगे।
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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र दो दिनों से अयोध्या में डेरा डाले हुए हैं। वे ट्रस्ट के पदाधिकारियों व एलएंडटी के इंजीनियरों के साथ राममंदिर निर्माण के साथ-साथ अयोध्या के पर्यटन विकास को लेकर भी मंथन करने में जुटे हुए हैं। इसी बीच राममंदिर निर्माण शुरू होने के साथ-साथ श्रीराम जन्मभूमि न्यास कार्यशाला में तराश कर रखे गए राममंदिर की पहली मंजिल के करीब सवा लाख घनफुट पत्थरों को रामजन्मभूमि परिसर में पहुंचाने का भी प्लान बन गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि राममंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र व एलएंडटी के इंजीनियरों के सामने इस प्लान को प्रस्तुत भी किया जा चुका है। इसके तहत हमारा प्रयास है कि रामजन्मभूमि कार्यशाला में रखे तराशे गए पत्थरों को राममंदिर परिसर तक एक साथ ही शिफ्ट किया जाए। सफाई करने के बाद एक ही बार में पत्थरों को शिफ्ट किया जाए, इसका लाभ होगा कि एक गणना हो जाएगी कि मंदिर के किस स्थान पर लगने वाले कितने पत्थर हमारे पास तैयार है। मॉडल परिवर्तित हुआ है। इसलिए पत्थरों की और आवश्यकता होगी। लार्सन टुब्रो के इंजीनियरों के साथ इसको लेकर चर्चा की जा चुकी है।

कार्यशाला से रात में आएंगे पत्थर
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि कार्यशाला से लेकर मंदिर परिसर तक की दूरी करीब छह किलोमीटर है। रामघाट स्थित कार्यशाला में तराश कर रखे गए पत्थरों को बड़ी क्रेनों द्वारा रात में ही परिसर ले जाया जाएगा, ताकि यातायात प्रभावित न हो। बताया कि नगर के परिक्रमा मार्ग से होते हुए मोबहरा, टेढ़ीबाजार, रेलवे क्रासिंग रोड से होकर रामजन्मभूमि परिसर में पत्थरों को पहुंचाया जाएगा। न्यास कार्यशाला के पीछे की दीवार को परिक्रमा मार्ग की तरफ तोड़कर रास्ता बनाया जाएगा। इसी रास्ते के माध्यम से पत्थर कार्यशाला से बाहर निकालकर रामजन्मभूमि परिसर तक पहुंचाए जाएंगे।
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शेष पत्थरों की तराशी को लेकर बन रहा प्लान
विहिप द्वारा प्रस्तावित मॉडल से बनने वाले दो मंजिला मंदिर मे करीब दो लाख घनफुट पत्थर लगने थे लेकिन चूंकि अब मॉडल तीन मंजिला हो गया है और इसकी लंबाई चौड़ाई भी बढ़ गयी है इसलिए और अधिक पत्थरों की जरूरत पड़ेगी। अन्नू भाई सोमपुरा बताते हैं कि पत्थर कितने लगने हैं, कहां शेष पत्थरों की तराशी होगी, यह सब अब एलएंडटी को तय करना है। हां, इतना जरूर है कि आवश्यक पत्थरों की खरीद ट्रस्ट को करनी है। शेष पत्थरों की तराशी रामजन्मभूमि परिसर में कार्यशाला खोलकर की जाएगी या फिर राजस्थान से ही तराशे गए पत्थर यहां लाकर मंदिर में जोड़े जाएंगे, इस पर विचार चल रहा है।
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