69 हजार शिक्षक भर्ती में शामिल आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने रविवार को बसपा कार्यालय का घेराव किया और बसपा सुप्रीमो मायावती के सुरक्षा इंचार्ज को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे चाहते हैं मायावती उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचाएं और न्याय दिलाएं। लंबे समय तक हुए संघर्ष के बाद भी अभ्यर्थियों को किसी तरह की सफलता नहीं मिली। पुलिस ने सभी को हिरासत में लेकर धरना स्थल ईको गार्डेन भेज दिया। इनका कहना है कि हाईकोर्ट का जो फैसला आया था सरकार ने उसे जानबूझ कर लटका दिया जिससे यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में चला गया। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई न होने से अभ्यर्थी नाराज हैं प्रदर्शनकारियों ने बताया की साल 2018 में यह भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। जब इसका परिणाम आया तो इसमें व्यापक स्तर पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय किया गया और उन्हें नौकरी देने से वंचित कर दिया गया। लंबे आंदोलन और न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद बीते 13 अगस्त 2024 को लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के हित में फैसला सुनाया और नियमों का पालन करते हुए अभ्यर्थियों को नियुक्ति दिए जाने का आदेश दिया। लेकिन, सरकार इस प्रकरण में हीलाहवाली कर रही हैं। अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता भेजे और हमारे पक्ष में सुनवाई करा कर हमें न्याय दिलाए।