अब शिक्षा के क्षेत्र में भी आधार कार्ड अनिवार्य किया जा रहा है। जिले में इस वर्ष यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा में वही छात्र-छात्राएं शामिल हो सकेंगे, जिनके पास आधार कार्ड होगा। इसे अनिवार्य कर दिया गया है।
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शनिवार को राजकीय जुबली इंटर कॉलेज में आयोजित परीक्षा केंद्रों के प्रधानाचार्यों की बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक ने यह निर्देश दिया। उन्होंने बिना मूल आधार कार्ड के छात्रों को परीक्षा केंद्र से बाहर करने का निर्देश दिया है। चिंताजनक पहलू यह है कि जिले में लगभग 35 प्रतिशत विद्यार्थियों के पास आधार कार्ड नहीं हैं।
जिले में बोर्ड परीक्षा के लिए 136 केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा से पूर्व तैयारियों को लेकर राजकीय जुबली इंटर कॉलेज में सभी परीक्षा केंद्रों के प्रधानाचार्यों की बैठक हुई। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने कहा कि जिन विद्यार्थियों के पास मूल आधार कार्ड नहीं होगा उन्हें परीक्षा केंद्र के गेट से बाहर कर दें।
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परीक्षा कक्ष में बैठने से पहले ही छात्रों के मूल प्रवेश पत्र, पंजीकरण और आधार कार्ड चेक किए जाएंगे। राजधानी में यूपी बोर्ड से संबद्ध करीब 790 माध्यमिक विद्यालय हैं। इस बार की बोर्ड परीक्षा में करीब 1,05,598 छात्र बैठेंगे।
35 प्रतिशत छात्रों के पास आधार कार्ड नहीं
- फोटो : demo pic
जिले में करीब 30 से 35 प्रतिशत छात्रों के पास आधार कार्ड नहीं है। डीआईओएस ने कहा कि अभी बोर्ड परीक्षा के लिए डेढ़ महीने का समय है। ऐसे में छात्रों को आधार कार्ड बनवाने का निर्देश जारी कर दें, ताकि बोर्ड परीक्षा से पहले ही उनके हाथ में आधार कार्ड हो।
इस वर्ष कक्षा 9 व 11 के पंजीकरण फॉर्म और 10 व 12वीं के बोर्ड फॉर्म भरवाने के लिए भी बोर्ड ने छात्रों के आधार लिंक कराने के निर्देश दिए थे। फॉर्म ऑनलाइन भराए जाने थे, लेकिन ऑनलाइन फॉर्म की व्यवस्था ऐसी थी कि बिना आधार के भी फॉर्म स्वीकार कर लिया गया। लेकिन परीक्षा के लिए आधार कार्ड होना अनिवार्य कर दिया है।
सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में खोले जाएंगे प्रश्न-पत्र
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बोर्ड परीक्षा के दौरान सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में प्रश्नपत्र के बंडल खोलने का निर्देश दिया गया है। इस बात का खास ध्यान रखने को कहा गया कि कोई गलत प्रश्न-पत्र का बंडल न खुलने पाए। खोलने से पहले स्कीम दोबारा जांचने के निर्देश दिए गए। वहीं जो पहली बार परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं वहां अलग से पर्यवेक्षक तैनात किए जाएंगे।
इसके अलावा जिला प्रशासन भी पर्यवेक्षक तैनात करेगा। जिन परीक्षा केंद्रों को पूर्व में डिबार करने की संस्तुति तो की गई लेकिन हुए नहीं, वहां विशेष व्यवस्था में परीक्षा कराई जाएगी। इसके अलावा इस वर्ष पंजीकरण को लेकर जिन विद्यालयों पर संदेह था, उन पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी।
जिन केंद्रों की कक्षाओं की खिड़कियां बाहर की तरफ खुलती हैं, उनको बंद करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा सभी कमरों में सीसीटीवी कैमरा, पर्याप्त फर्नीचर, अग्निशमन यंत्र, पानी, शौचालय, बिजली, बाउंड्रीवाल की व्यवस्था पूरी करने के भी निर्देश दिए गए।
शिक्षकों की ड्यूटी को अनिवार्य कर दिया गया है। 31 जनवरी के बाद सभी शिक्षकों के अवकाश लेने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। सीसीएल का भी लाभ नहीं दिया जाएगा। सिर्फ मैटरनिटी लीव मिल सकती है। जिन स्कूलों की छात्राओं का सेंटर दूसरे विद्यालयों में हैं, वहां उस विद्यालय की दो शिक्षिकाओं की भी ड्यूटी लगाई जाएगी। शिक्षकों को रीविजन कराने और अनसॉल्वड पेपर्स हल कराने के निर्देश दिए गए।
निशुल्क पार्किंग की व्यवस्था करानी होगी
परीक्षा केंद्रों को छात्रों के लिए निशुल्क पार्किंग की व्यवस्था भी कराने के निर्देश दिए हैं। यदि परिसर में जगह नहीं है तो अन्य स्थान पर पार्किंग की व्यवस्था करनी होगी। परीक्षा केंद्र के बाहर ढाई सौ मीटर तक कोई वाहन न खड़ा करने के निर्देश दिए गए। बैठक में जेडी सुरेंद्र कुमार तिवारी, डीआईओएस द्वितीय नंद कुमार उपस्थित रहे।
इस संबंध में डीआईओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने कहा कि परीक्षा की तैयारियों को लेकर शासन स्तर के उच्च अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हो चुकी है। इसमें नकल विहीन परीक्षा कराने के निर्देश दिए गए थे। उसी क्रम में सभी परीक्षा केंद्रों के प्रधानाचार्यों को आधार कार्ड, सीसीटीवी, कक्ष निरीक्षक, प्रश्नपत्र समेत अन्य अव्यवस्थाओं के बाबत निर्देश दिए गए हैं।