लखनऊ। एवोक इंडिया की ओर से गोमतीनगर के एक होटल में बृहस्पतिवार को डिजिटलीकरण और वित्तीय समावेशन विषय पर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय साक्षरता कॉन्क्लेव के पांचवें संस्करण में विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटलीकरण का ग्रामीण भारत पर बेहद सकारात्मक असर पड़ा है। किसान सीधे इंटरनेट से जुड़ रहे हैं। उनकी वित्तीय साक्षरता बढ़ रही है। विशेषज्ञों ने कहा कि देश में 124 करोड़ मोबाइल कनेक्शन हैं। 80 करोड़ ब्रॉडबैंड कनेक्शन हैं। 134 करोड़ आधार एनरोलमेंट हैं। इसमें ग्रामीण भारत का हिस्सा भी बड़ा है। ऐसे में यह कहना सही होगा कि वित्तीय साक्षरता के लिहाज से ग्रामीण भारत में जागरुकता तेजी से बढ़ी है।
मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, विशिष्ट अतिथि अश्विनी भाटिया सदस्य सेबी ने उद्घाटन किया। ब्रजेश पाठक ने कहा कि ऐसी कंपनियों और इक्विटी में निवेश करना चाहिए, जो लंबे समय तक लाभ दे। कॉन्क्लेव में कृषि, महिलाओं, युवाओं, एमएसएमई, उद्यमियों और स्टार्ट अप्स और बीएफएसआई क्षेत्र के लिए डिजिटलीकरण व वित्तीय समावेशन पर विचार-विमर्श हुआ। कृषि उत्पादन आयुक्त मनोज कुमार सिंह ने बैंक सारथी महिलाओं के बारे में जानकारी दी। सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अश्विनी भाटिया ने कहा कि 30 वर्षों में एसआईपी लगभग तीन करोड़ हो गया है, हमें वित्तीय निवेश के ज्ञान में निवेश करना चाहिए। वित्तीय समावेशन और साक्षरता नेतृत्व पुरस्कार पांच विजेताओं को दिए गए। नाबार्ड मल्टी सेंसरी सोसाइटी के लिए फंड और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है। साथ ही यह भी कहा गया कि डिजिटलीकरण रणनीतिक वातावरण का एक स्रोत बन रहा है। एमएसएमई उद्यमी और स्टार्टअप पैनल में ई-कोष के सीईओ अमित सक्सेना ने कहा कि युवाओं को बढ़-चढ़कर आगे आना चाहिए और रोजगार विकसित करने चाहिए। भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. बालू कंचप्पा उपस्थित रहे।