दोपहर में लखनऊ में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए थे। शाम को बिल्डिंग गिरने पर भूकंप से बिल्डिंग गिरने का फर्जी मेसेज वायरल होने लगा। इसमें कहा गया कि बिल्डिंग कमजोर होने की वजह से भूकंप से ढह गई। हालांकि, जानकारों का कहना है कि ऐसा भूकंप से संभव नहीं है।
एलडीए के पूर्व अधिशासी अभियंता और मूल रूप से सिविल इंजीनियर प्रताप शंकर मिश्रा ने बताया कि जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक स्टिल्ट पार्किंग एरिया में खोदाई का काम चल रहा था। आशंका है कि इस खोदाई में फाउंडेशन ग्रिड को नुकसान पहुंचा हो। फाउंडेशन ग्रिड असल में कॉलम और बीम से बना ऐसा जाल होता है जोकि जमीन के अंदर पूरी इमारत को मजबूती से टिकाए रखने के लिए तैयार किया जाता है।
अगर बीम या कॉलम में से किसी को भी नुकसान होगा तो बिल्डिंग पूरी या आंशिक रूप गिरने की आशंका खड़ी हो जाती है। मंगलवार को 5.4 रिक्टर स्केल का भूकंप आया था। इतनी कम तीव्रता के भूकंप से इमारतें नहीं गिरा करती हैं। कोई भी इमारत सात रिक्टर स्केल तक की तीव्रता सहने लायक बनाई जाती है। इससे अधिक तीव्रता के बाद ही बिल्डिंग गिरने की संभावना बनती है।
डीएम सूर्यपाल गंगवार ने कहा कि हादसे के पीछे क्या कारण है? इसको जांच के बाद ही कहा जा सकता है। रेस्क्यू ऑपरेशन चालू है। पूरी कोशिश की जा रही है कि सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया जाए।
ये हो सकते हैं ढहने के कारण
लखनऊ में पांच मंजिला अपार्टमेंट ढहने का कारण बेसमेंट में खोदाई के साथ-साथ भूकंप आना भी माना जा रहा है। आईईटी के सिविल विभाग के अध्यक्ष प्रो. वीरेंद्र पाठक कहते हैं कि भूकंप इतना तेज नहीं था कि किसी बहुमंजिला इमारत को नुकसान पहुंचा सके। बिल्डिंग गिरने की दो वजहें हो सकती हैं। एक, इसके निर्माण में भूकंप रोधी प्रावधानों का ठीक से पालन नहीं किया गया हो। दो, बिना विशेषज्ञों की देखरेख में खोदाई कराई गई हो, जिससे ढांचा कमजोर हो गया हो और भूकंप के हल्केझटकों ने ही उसे नुकसान पहुंचा दिया। हालांकि, मौके पर स्ट्रक्चर की जांच के बाद ही अंतिम रूप से किसी सही निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।