केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का सबसे ज्यादा भरोसा महिलाओं पर बना हुआ है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024-25 के अंतरिम बजट में लाभार्थीपरक योजनाओं के दायरे में जिन समूहों को सीधे तौर पर शामिल किया है, वे सभी महिलाओं वाली हैं। आबादी व लाभार्थी के लिहाज से इसके दायरे में सबसे ज्यादा महिलाएं यूपी की ही आएंगी।
वित्त मंत्री ने स्वास्थ्य सेक्टर में काम करने वाली आशा कार्यकर्ता तथा बाल विकास एवं महिला कल्याण सेक्टर में कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं को आयुष्मान योजना के दायरे में लाने का एलान किया है। इस योजना में 5 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा है। यूपी में आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की संख्या 5.57 लाख से ज्यादा है। इसी तरह सर्वाइकल कैंसर महिलाओं की सेहत लिए एक नई चिंता के रूप में उभरा है। इसका जल्दी पता नहीं चल पाता। इससे प्रांरभ से ही सुरक्षा के लिए 9-14 वर्ष की आयु की बालिकाओं के टीकाकरण को प्रोत्साहन देने का एलान किया गया है। यूपी में 9-14 वर्ष की बालिकाओं की संख्या 2.75 करोड़ का अनुमान है।
केंद्र स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के प्रयास में जुटा है। इसके अंतर्गत तमाम तरह की स्वरोजगार परक गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने का प्रयास है। देश में दो करोड़ के लक्ष्य में यूपी को 28 लाख लखपति दीदी का लक्ष्य दिया गया था। एक करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य बढ़ाए जाने से यूपी में करीब 15 हजार अतिरिक्त महिलाएं इसके दायरे में आ सकती हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब परिवारों को पीएम आवास दिए जा रहे हैं। देश में करीब तीन करोड़ पीएम आवास पूरे होने वाले हैं। यूपी इसमें करीब 36 लाख आवास आवंटित हो चुके हैं। दो करोड़ पीएम आवास बढ़ाने से यूपी को करीब 25 लाख आवास और मिलने की संभावना बढ़ गई है। आमतौर पर पीएम आवास का आवंटन महिलाओं के नाम किया जा रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि पांच राज्यों के पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को जिस तरह सफलता मिली, उसमें महिलाओं की अहम भूमिका मानी गई। आगामी लोकसभा चुनाव से पहले अंतरिम बजट बनाते समय वित्त मंत्री के ध्यान में यह बात कहीं न कहीं जरूर रही होगी। महिला कल्याण से जुड़ी ये पहल आम चुनाव में सरकार की सियासी उम्मीदों को भी विस्तार देने वाली साबित हो सकती है।