लखनऊ। लद्दाख की चट्टानों, शैलचित्रों और पुरातात्विक धरोहर को अब वैज्ञानिक तरीके से सहेजने की तैयारी है। राजधानी स्थित बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (बीएसआईपी) ने लद्दाख प्रशासन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के साथ मिलकर इन महत्वपूर्ण स्थलों के दस्तावेजीकरण, वैज्ञानिक मूल्यांकन और संरक्षण की पहल शुरू की है। इसके लिए तीनों संस्थानों के बीच जल्द ही एमओयू होने जा रहा है। बीएसआईपी के निदेशक प्रो. महेश जी. ठक्कर ने बताया कि लद्दाख में कई महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक, पुरातात्विक और सांस्कृतिक स्थल, प्राकृतिक क्षरण और बढ़ते मानवीय दखल से प्रभावित हो रहे हैं। प्रो. ठक्कर की हाल की लेह यात्रा के दौरान संस्कृति एवं पर्यटन सचिव संजीत रॉड्रिक से इस पर विस्तृत चर्चा हुई। योजना के तहत महत्वपूर्ण भू-विरासत स्थलों की पहचान कर उनका वैज्ञानिक अध्ययन और संरक्षण किया जाएगा। इसमें एएसआई की वरिष्ठ अधिकारी डॉ. सोनम स्पलजिन और लद्दाख विश्वविद्यालय के शोधार्थी मो. इलियास की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। (माई सिटी रिपोर्टर)