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तो अधिकारी किस मर्ज की दवा: भाजपा

Wed, 25 Sep 2013 10:31 PM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
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भाजपा ने आरोप लगाया कि पुलिस महानिदेशक की यह स्वीकारोक्ति खतरनाक है कि दंगा रोकने में पुलिस नाकाम है।
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भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक ने सवाल उठाया कि इसके लिए अखिर कौन जिम्मेदार है? मुजफ्फरनगर हिंसा में पुलिस की निष्क्रियता के पीछे कौन है?

नागल मंदौड़ की पंचायत से माहौल खराब होने की आशंका की सूचना यदि पुलिस के पास थी तो कार्रवाई क्यो नही हुई? किसके दबाव में पुलिस ने कार्रवाई नही की?

इन सब सवालों का सरकार को उत्तर देना चाहिए। अधिकारियों को किसी विषय पर रोना रोने के बजाय कार्रवाई करनी चाहिए। आखिर अधिकारी किस मर्ज की दवा हैं।

कहा कि जब पुलिस महानिदेशक ही मानने लगें कि दंगा रोकने में पुलिस नाकाम है तो कानून-व्यवस्था की हालत समझी जा सकती है।

नए खुलासों से यह स्पष्ट होने लगा है कि दंगा समाजवादी पार्टी और अखिलेश सरकार की सोची समझी साजिश का परिणाम है।

प्रवक्ता ने स्टिंग ऑपरेशन में हुए खुलासे और अब राज्य के पुलिस महानिदेशक के बयान के बाद भी केंद्र सरकार की चुप्पी आश्चर्यजनक है।

कहा कि जब केंद्रीय गृह राज्यमंत्री खुद यह बयान दे रहे हैं कि उत्तर प्रदेश को पहले ही सावधान कर दिया गया था। पर, अखिलेश सरकार ने कुछ नहीं किया। तो केंद्र सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए।
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