लोकसभा चुनाव सिर पर आ गए हैं, पर भाजपाइयों के बीच सिर फुटौव्वल जारी है।
कदम-कदम पर झगड़ा हो रहा है। एक-दूसरे के खिलाफ अभियान चल रहे हैं। चिट्ठियां लिखी जा रही हैं।
चुनाव की तैयारियों में जुटने की किसी को न तो फिक्र है और न फुरसत।
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पूर्व पदाधिकारी वर्तमान के खिलाफ मुहिम में जुटे हैं तो मौजूदा, पूर्व पर आरोप लगा रहे हैं। दावे तमाम हो रहे हैं लेकिन भाजपा की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रहीं।
कई मोर्चों के बाद अब भारतीय जनता युवा मोर्चा का झगड़ा सड़क पर आ गया है।
मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष राय के फैसलों पर सवाल उठाते हुए आए दिन दो से तीन पत्र मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को भेजे जा रहे हैं।
इन पत्रों में युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष राय पर ही नहीं, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी पर भी आरोप लगाए गए हैं।
हालांकि वाजपेयी व राय इन आरोपों को निराधार करार दे चुके हैं। उनका तर्क है कि सभी फैसले संगठन की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुए हैं।
अगर किसी को शिकायत है तो वह उचित फोरम पर अपनी बात रखे। पदों को लेकर बवाल पहली बार नहीं हो रहा है।
महिला मोर्चा और अल्पसंख्यक मोर्चा को लेकर भी विवाद उठ चुका है। दोनों मोर्चों में पदाधिकारी बनाने के खिलाफ खूब चिट्ठियां लिखी चुकी हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लखनऊ स्थित मुख्यालय तक पंचायत हो चुकी है, पर कोई नतीजा नहीं निकला।
मोर्चा व प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों को लेकर ही नहीं, मुख्य संगठन में पदाधिकारियों को मनोनयन को लेकर भी खूब खींचतान व सिर फुटौव्वल हुई।
इसको लेकर भी खूब चिट्ठियां लिखी गईं। विवादों के चलते अभी तक मुख्य संगठन में उपाध्यक्ष के दो पद नहीं भरे जा सके हैं।
हालांकि भाजपा के प्रवक्ता डॉ. मनोज मिश्र कहते हैं कि संगठन पूरी तरह एकजुट है। कहीं कोई खींचतान या सिर फुटौव्वल जैसी स्थिति नहीं है।
हर आदमी को पद देकर संतुष्ट नहीं किया जा सकता। जिसे शिकायत है, उसे उचित मंच पर अपनी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए।
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