भाजपा ने सहकारी ग्राम्य विकास बैंक चुनाव में 312 में से 293 सीटें जीतकर अपना दबदबा कायम कर लिया है। इसके साथ ही बैंक के सभापति पद पर भाजपा का कब्जा होना तय हो गया है। 1998-99 के बाद यह दूसरा मौका होगा जब बैंक की प्रबंध समिति में भाजपा का दबदबा होगा। बताया जाता है कि इससे पहले कभी किसी एक दल की इतनी बड़ी जीत नहीं हुई।
प्रदेश में सहकारी ग्राम्य विकास बैंक की 323 शाखाएं हैं। प्रत्येक शाखा से एक प्रतिनिधि का चुनाव होना था। ये निर्वाचित प्रतिनिधि मिलकर 14 डायरेक्टर का चुनाव करेंगे जो अपने बीच से किसी को सभापति चुनेंगे। इस बार अलग-अलग कारणों से 11 शाखाओं के चुनाव स्थगित हो गए। कुल 312 शाखाओं पर चुनाव हुए। इनमें 293 पर भाजपा के उम्मादवीर जीते। शेष 19 पर अन्य जीते हैं। इनमें शिवपाल सिंह यादव और उनकी पत्नी सरला यादव के अलावा ज्यादातर सपा के उम्मीदवार हैं।
जिन 312 शाखाओं के चुनाव हुए, उनमें 276 में भाजपा उम्मीदवार निर्विरोध विजयी रहे हैं। इसकी मुख्य वजह सरकार व भाजपा संगठन की व्यूह रचना मानी जा रही है। सरकार ने इस चुनाव में विपक्ष, खास तौर से सपा का दबदबा खत्म करने के लिए डायरेक्टरों की सीट का जिस तरह आरक्षण बदलकर घेराबंदी की, उससे इन चुनाव में अपने वर्चस्व के लिए पहचाने जाने वाले कुछ चेहरों के लिए प्रबंध समिति में पहुंचने का रास्ता बंद हो गया। इस कारण वे तटस्थ हो गए। वहीं कुछ ऐन वक्त पर पाला बदलकर भाजपा में आ गए। प्रदेश के सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा ने जीत का श्रेय पार्टी संगठन को देते हुए कहा कि उसने कार्यकर्ताओं को अभियान चलाकर सक्रिय किया। उससे आई जागरूकता ने ये परिवर्तन कराया है।
अवध की 65 में 63 सीटों पर भाजपा का परचम
भाजपा को पश्चिम क्षेत्र की 59 शाखाओं के चुनाव में 55, ब्रज की 82 शाखाओं में 78, कानपुर की 45 में 34, अवध में 65 में 63, काशी में 38 में 33 और गोरखपुर में 34 में 30 स्थानों पर जीत मिली है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने चुनाव में हेराफेरी के विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए विजयी शाखा प्रतिनिधियों को बधाई दी है। उन्होंने बैंकों के जरिये किसानों की ज्यादा से ज्यादा मदद आह्वान किया है।