ढोल खुद ही पोला नहीं होता बल्कि तमाम लोगों की पोल को छिपाने के काम भी आता है।
जिसे भरोसा न हो तो वह भाजपा से सीख सकता है। कैराना की पराजय का संदेश भी हरियाणा व महाराष्ट्र की विजय के बीच ही आया।
पर, कैमरे वालों के सामने भाजपाइयों ने ऐसा ढोल बजाया कि लोग उसके शोर में भाजपाइयों के चेहरे पर विषाद की रेखाएं तलाशना ही भूल गए।
जश्न समाप्त हुआ तो किसी ने पार्टी के मुखिया से कहा, ‘यह आइडिया दिमाग में कहां से आया?’
अध्यक्ष जी ने डपटा, पता नहीं कब सीखोगे। ढोल से सीखो। जितना ज्यादा शोर मचाओगे, उतना ही लोगों की आवाज तुम्हारे कान में नहीं पहुंचेगी।
साथ बैठे लोगों के दिमाग में महीनों से चल रही यह गुत्थी सुलझ गई कि अध्यक्ष जी कार्यक्रमों का ऐलान पर ऐलान क्यों करते चले जाते हैं। इस बात की परवाह किए बगैर कि उन पर अमल होगा या नहीं।