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UP BJP: भाजपा की पसमांदा समाज को रिझाने की मुहिम से सियासी खलबली, साबित हो सकता है गेम चेंजर

Tue, 18 Oct 2022 11:05 AM IST
ishwar ashish आरिफ, अमर उजाला, लखनऊ

सार

भाजपा की कोशिश को पसमांदा समाज के जिम्मेदारों ने सराहा है। उनका कहना है कि सपा-बसपा व कांग्रेस ने उनके साथ सिर्फ छल किया है। यही कारण है कि पसमांदा समाज आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा हुआ है।
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- फोटो : सोशल मीडिया
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एक ही सफ में खड़े हो गए महमूद ओ अयाज

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ना कोई बंदा रहा न कोई बंदा नवाज

मशहूर शायर अल्लामा इकबाल इस शेर के जरिए बताते हैं कि महमूद गजनवी और उनके गुलाम अयाज जब नमाज पढ़ने खड़े होते थे तो वे एक ही सफ (लाइन) में होते थे। उस वक्त न कोई बादशाह होता था न कोई गुलाम। आज हालात इससे जुदा हैं, मुसलमान कई हिस्सों में बंटे हैं। मुसलमानों की आबादी में सबसे ज्यादा (तकरीबन 85 प्रतिशत) पसमांदा मुसलमान हैं। इनका आरोप है कि आजादी के बाद से उनसे सिर्फ छल हुआ है।

पिछले दिनों मुस्लिम बहुल आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा को जीत मिली थी। कहा गया, मुसलमानों के बड़े वर्ग ने भाजपा की हिमायत की। दरअसल भाजपा 2014 के बाद से अपनी छवि बदलने की कवायद में जुटी है। वह सिर्फ सवर्णों ही नहीं, बल्कि पिछड़ों व दलितों को नुमाइंदगी देने वाली पार्टी बन गई है। पीएम मोदी भी पसमांदा मुसलमानों के बीच पार्टी की पैठ बढ़ाने पर जोर दे चुके हैं।
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लखनऊ में पिछले दिनों भाजपा प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा की ओर से हुए पसमांदा मुस्लिम बुद्धिजीवी सम्मेलन और मंगलवार को होने वाले अखिल भारतीय पसमांदा मुस्लिम मंच के कार्यक्रमों को इसी नजरिए से देखा जा रहा है। सियासी गलियारे में मुसलमानों को लेकर नए समीकरण की भूमिका बांधी जाने लगी। पार्टी अगर इस लाइन पर आगे बढ़ते हुए सफल होती है तो मुल्क की सियासत के लिए यह ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। भाजपा के इस कदम से उन पार्टियों में खौफ है जो अब तक भाजपा का डर दिखा कर मुसलमानों (खासतौर से पसमांदा समाज) का वोट हासिल कर रही थीं।

भाजपा सरकार में हमें मिली हिस्सेदारी : वसीम
 ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के प्रदेश अध्यक्ष वसीम राइन कहते हैं कि देश मेें अब तक जो भी पद मुसलमानों के हिस्से में आए वे ज्यादातर ऊंची जाति वालों के ही हिस्से में गए। भाजपा सरकार में हमको हिस्सेदारी मिली। दानिश अंसारी के तौर पर मंत्री मिला तो अशफाक सैफी, जावेद इफ्तेखार, चौधरी कैफुल वरा अंसारी व अब्दुल्ला कुट्टी अंसारी आदि को सरकारी पदों पर तैनात किया गया। मोमिन अंसार सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अकरम अंसारी कहते हैं कि मुसलमानों को कभी भाजपा से परहेज नहीं था, बस उसके एजेंडे से परेशानी थी। भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष अमील शम्सी कहते हैं कि मुसलमानों को अब यह समझ में आने लगा है कि उसके आर्थिक, सामाजिक व शैक्षिक पिछड़ेपन की वजह कांग्रेस, सपा व बसपा जैसी पार्टियां रही हैं।

वादे भूल गईं सपा, बसपा और कांग्रेस 
ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर मो. यूनुस कहते हैं कि कांग्रेस, बसपा व सपा ने सपने दिखाए, वोट लिया और वादे भूल गए। कुरैशी वेलफेयर फाउंडेशन के उपाध्यक्ष रहनुमा कुरैशी कहते हैं कि भाजपा ने केंद्र व प्रदेश में सत्ता संभालने के बाद जो योजनाएं चलाईं, उनमें बिना जाति-धर्म देखे सबको फायदा दिया। पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीस मंसूरी कहते हैं कि संविधान के अनुच्छेद 341 के जरिए अनुसूचित जाति को आरक्षण मिलता है, लेकिन उसमें राष्ट्रपति का एक आदेश जुड़ा है। इसके तहत हिंदुओं में अछूत माने जाने वाली जातियों को ही इसका लाभ मिलेगा। बाद में इसमें सिख और बौद्ध धर्म मानने वालों को शामिल किया गया लेकिन इस्लाम व ईसाई धर्म के लोगों को जगह नहीं मिली। शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अली जैदी कहते हैं कि काफी संख्या में मुसलमान भाजपा की नीतियों से प्रभावित हो रहे हैं।

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सरकार ने कोई भेदभाव नहीं किया : अंसारी

प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी कहते हैं कि सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में कहीं भी भेदभाव नहीं हुआ। बड़ी संख्या में मुसलमान लाभार्थी बनें। पक्के मकान, शौचालय, मुफ्त राशन और इलाज समेत कई योजनाओं ने उनको भाजपा की तरफ आकर्षित किया।

18 राज्यों में पसमांदा
वसीम राइन बताते हैं कि देश की बात करें तो पसमांदा समाज के लोग 18 राज्यों में सर्वाधिक हैं। इनमें यूपी, बिहार, राजस्थान, तेलंगाना, कर्नाटक, मध्य प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं। पश्चिमी यूपी में इनकी आर्थिक स्थिति पूर्वांचल के मुसलमानों से बेहतर है। हर जगह इनकी मौजूदगी जीत-हार का समीकरण बदलने की ताकत रखती है।

ये जातियां पसमांदा में शामिल
यूनूस के मुताबिक मुस्लिम समाज के पिछड़े वर्ग की सूची में 52 जातियां हैं जिन्हें पसमांदा मुसलमान कहा जाता है। इनमें भटियारा, मोची, मनिहार, पैमदी, गुर्जर, राजगीर, गद्दी, मेवाली, रंगरेज, भड़भूजा, नालबंद, सिकलीगर, धोबी, शाह, फकीर, हम्माल, कसाई, राईन, गोली, सैफी, जुलाहा व शीशगर जातियां प्रमुख हैं।
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