लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के रसायन विज्ञान विभाग ने बिना धातु उत्प्रेरक के प्राथमिक अमाइन बनाने वाली हरित तकनीक विकसित की है। इसे भारत सरकार से पेटेंट संख्या 595951 के तहत स्वीकृति मिली। डॉ. जवाहर लाल जाट के अनुसार, प्राथमिक अमाइन हजारों दवाइयों व कृषि रसायनों के लिए आवश्यक हैं। पुरानी प्रक्रियाओं में महंगी धातुओं का उपयोग होता था, जिससे उत्पादन महंगा व पर्यावरण को नुकसान होता था। बीबीएयू की नई तकनीक में धातु उत्प्रेरक की जरूरत नहीं पड़ती। यह प्रक्रिया सामान्य परिस्थितियों में एक ही चरण में पूरी होती है, जिससे अधिक शुद्ध उत्पाद मिलता है। शोधार्थी पुनीत कुमार की इसमें अहम भूमिका रही। कुलपति प्रो. राजकुमार मित्तल ने कहा, अमाइन लागत घटने से कई दवाएं सस्ती होंगी। यह नवाचार आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियानों को बढ़ावा देगा।