राजेश श्रीवास्तव के मुताबिक तैनाती के दौरान आनंद ने बैंक के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर नॉन सीटीएस चेक का क्लोन तैयार किया। ये सीटीएस चेक के रूप में तैयार किए गए। बैंक के ऑनलाइन रिकॉर्ड में नॉन सीटीएस चेक लंबित दिखाए जा रहे थे।
इसका फायदा उठाकर इन चेक के नंबरों को क्लोन चेक पर कंप्यूटर से अंकित किया। इसके बाद आनंद ने भुगतान कराने के लिए चेक जारी करवा दिया। नॉन सीटीएस चेक का क्लोन तैयार करने के दौरान आनंद वाराणसी निवासी श्रीकांत के सीधे संपर्क में था। जालसाजों ने लविवि के वित्त व लेखाधिकारी का दस्तखत भी फर्जी तरीके से चेक पर दर्ज करा दिया।
चेक को खुद पास भी कर दिया
पुलिस के मुताबिक आनंद यूको बैंक में आहरण अधिकारी का काम देखता था। उसके पास विश्वविद्यालय से जुड़े कई विभागों के खातों का हिसाब रहता था। वह खुद ही इनका चेक भुगतान के लिए भेजता था।
इसी अधिकार का नाजायज लाभ उठाते हुए आनंद ने परीक्षा विभाग के 14 चेकों का क्लोन तैयार कर उसे भुगतान के लिए भी संस्तुति दे दी। इसके बाद लविवि के खाते से 14 चेकों से 1,39,78,067 रुपये उड़ा लिए। पुलिस के मुताबिक जिन चेकों का क्लोन तैयार किया गया, वह वर्ष 2000 में जारी किए गए थे।
क्षेत्राधिकारी महानगर आईपीएस सोनम कुमार के मुताबिक मास्टर माइंड श्रीकांत ने आनंद के जरिये परीक्षा विभाग के चेक के बारे में पूरी जानकारी ली। इसके बाद वित्त अधिकारी व लेखाधिकारी का हस्ताक्षर रंगीन फोटोकॉपी उपलब्ध कराई।
वहीं, नॉन सीटीएस चेकों का नंबर प्रिंट कराकर कई फर्मों के खातों में भुगतान के लिए लगा दिया। फर्म संचालकों ने नकद कमीशन लेने के बाद पूरी रकम लौटा दी।
लविवि के परीक्षा विभाग के चेक का क्लोन बनाकर 1 करोड़ 39 लाख रुपये उड़ाने वाले यूको बैंक का क्लर्क आनंद शुक्ल पर पुलिस को पहले से ही संदेह था। आईपीएस क्षेत्राधिकारी सोनम कुमार के मुताबिक, अक्तूबर में तीन फर्म के मालिकों को पुलिस ने दबोचा था तो उन्होंने भी इसका नाम लिया।
पुलिस ने जब फर्म मालिकों की कॉल डिटेल खंगाली तो उसमें आनंद का मोबाइल नंबर भी मिला। उसके नंबर से भुगतान के लिए चेक लगने व उसके दूसरे दिन बातचीत हुई थी। जब यह बात सामने आई तो पुलिस ने आनंद पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया।
इन फर्मों के खाते में डाली गई थी रकम: जालसाजों ने मेसर्स केके कंस्ट्रक्शन-9,99,570, मेसर्स दिव्या इलेक्ट्रिकल्स-9,97,864, मेसर्स दिव्या इलेक्ट्रिकल्स 9,98,570, मेसर्स दिव्या इलेक्ट्रिकल्स 9,98,620, मेसर्स दिव्या इलेक्ट्रिकल्स 9,98,775, मेसर्स दिव्या इलेक्ट्रिकल्स 9,99,695, मेसर्स शाह एजेंसी 9,96,595, मेसर्स रीविश्वा 9,98,360, मेसर्स शाह एजेंसी 9,98,210, मेसर्स मीना एंड संस 9,98,566 और मेसर्स मां वैष्णो इंटरप्राइजेज के खाते में 9,98,110 रुपये का चेक भुगतान कराया था।
प्रभारी निरीक्षक अमरनाथ वर्मा के मुताबिक, मामले में पुलिस ने नई दिल्ली के बदरपुर निवासी सुशील यादव, पटना के दानापुर के रोनित गुप्ता व बिहार के अलवर के अमरेंद्र कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। तीनों ने अपनी फर्म के नाम पर क्लोन चेक का भुगतान कराया।
इसके बदले पांच प्रतिशत तक का कमीशन लिया। वहीं, आरोपित क्लर्क आनंद शुक्ल पहले भी फर्जीवाड़ा कर चुका है। उसके खिलाफ मुकदमा भी है। यूको बैंक ने उसका स्थानांतरण कर फैजाबाद भेज दिया। पुलिस आरोपियों का आपराधिक इतिहास खंगाल रही है।