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जनता अब नहीं बन पाएगी 'बकरी'

Sat, 12 Jul 2014 12:07 PM IST
आशुतोष मिश्रा/ अमर उजाला, लखनऊ
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जनता बेचारी ठगी की मारी। कभी उसे नेता ठगते हैं, तो कभी नौकरशाह, पुलिस भी पीछे नहीं रहती।
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बाकी डाकू, चोर, बदमाश तो हमेशा ही फिराक में ही रहते हैं। जनता आए दिन बकरी की मानिंद कुशासन और शोषण का शिकार बनती रहती है।

वो ना आ करती है और न ही ऊह... लेकिन कई बार जब यही जनता जागरूक हो बगावत कर बैठती है तो... बस सब कुछ ठीक ठाक हो जाता है।

जागी जनता सब कुछ अपने पक्ष में ही कर लेती है। शुक्रवार को राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में आईसीसीआर के सहयोग से हुए नाटक बकरी के मंचन ने वर्तमान सामाजिक व्यवस्था पर कटाक्ष किया।

करीब पौने दो घंटे से भी अधिक अवधि के नौटंकी शैली के सर्वेश्वर दयाल सक्सेना लिखित नाटक का निर्देशन-परिकल्पना डॉ. ओमेंद्र कुमार की रही।
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