लखनऊ। कैथेटर से बार-बार होने वाले मूत्र मार्ग संक्रमण से जूझ रहे मरीजों के लिए आयुर्वेद एक संभावित विकल्प हो सकता है। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ आयुर्वेद रिसर्च में प्रकाशित शोध ने आयुर्वेदिक चिकित्सा की भूमिका दर्शाई है। टूडियागंज स्थित राजकीय आयुर्वेद कॉलेज और देहरादून स्थित दून मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने यह शोध किया। आयुर्वेद कॉलेज के पूर्व अध्यक्ष संजीव रस्तोगी ने बताया कि एक 37 वर्षीय मरीज पांच वर्षों से क्लीन इंटरमिटेंट कैथेटराइजेशन कर रहा था। मरीज को लगातार मूत्र संक्रमण और अन्य समस्याएं थीं। आयुर्वेदिक इलाज के बाद मरीज को पांच महीने से अधिक समय तक संक्रमण नहीं हुआ, जबकि कैथेटर प्रक्रिया जारी रही। चंद्रप्रभा वटी, गोक्षुरादि गुग्गुलु और वरुण-शिग्रु क्वाथ जैसी औषधियों का उपयोग हुआ। शोधकर्ताओं ने बताया कि आयुर्वेद प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर संक्रमण कम कर सकता है। शोधकर्ताओं ने बड़े वैज्ञानिक परीक्षणों की आवश्यकता पर जोर दिया है।