अयोध्या जिला महिला चिकित्सालय में अव्यवस्था अपने चरम पर है। कभी ऑपरेशन के लिए पैसे लेना, बच्चे के जन्म पर वसूली जैसे आरोप तो आए दिन सामने आते ही रहते हैं। अब शनिवार को इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर अंबेडकरनगर में अपने घर से ही नहीं आईं। ऐसे में एक प्रसूता साढ़े पांच घंटे प्रसव पीड़ा से छटपटाती रही, चिल्लाती रही। भाजपा नेताओं की सिफारिश के बाद आखिरकार साढ़े पांच घंटे बाद दूसरी डॉक्टर ने उसका ऑपरेशन किया।
भरतकुंड में देवीपुर के निवासी रविप्रकाश दूबे की पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई तो वे उसे लेकर शनिवार सुबह सात बजे जिला महिला चिकित्सालय की इमरजेंसी पहुंचे। यहां उनकी पत्नी को भर्ती तो कर लिया गया, लेकिन इमरजेंसी में कोई डॉक्टर नहीं था। ऐसे में दोपहर 12 बजे तक वे स्टाफ से फरियाद करते रहे कि उनकी पत्नी को बहुत तकलीफ है और उसका ऑपरेशन करवाइ्ये, लेकिन स्टाफ नार्मल डिलीवरी का दावा करते हुए टरकाता रहा।
इस बीच उनके भाई राम दूबे ने जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह टिल्लू को फोन करके अपनी व्यथा सुनाई। डीसीबी अध्यक्ष ने फौरन अस्पताल के सीएमएस को फोन करके बताया कि महिला को ऑपरेशन की जरूरत है और इमरजेंसी में कोई डॉक्टर नहीं है। तब कहीं जाकर करीब 12:30 बजे डॉक्टर आईं और उन्होंने महिला का ऑपरेशन किया।
इमरजेंसी का ड्यूटी चार्ट भरा ही नहीं जाता
अस्पताल में लगा ड्यूटी चार्ट देखने से पता चलता है कि लंबे समय से यह चार्ट अपडेट ही नहीं हुआ है। चार्ट में सितंबर लिखा हुआ साफ नजर आता है। इसके अलावा डॉक्टरों की जो ड्यूटी लगी हुई लिखी है, वह भी बेहद पुरानी है।
इमरजेंसी में तैनात डॉ. ममता चौधरी अंबेडकरनगर से आई ही नहीं। कोई सूचना भी नहीं दी तो मैं क्या करूं? सूचना मिली तो वैकल्पिक इंतजाम किया गया। अब उन्हें नोटिस देकर उनका वेतन काटने की कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. आरपी वर्मा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक