विशेष सीबीआई अदालत ने 30 सितंबर 2020 को जारी अपने फैसले में पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार और साध्वी ऋतंभरा समेत सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया था।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की सीबीआई अदालत द्वारा बाबरी विध्वंस के आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले के विरोध में मुस्लिम पक्षकार रहे हाजी महबूब अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।
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विशेष सीबीआई अदालत ने 30 सितंबर 2020 को जारी अपने फैसले में पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार और साध्वी ऋतंभरा समेत सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया था।
सीबीआई अदालत के फैसले के खिलाफ अयोध्या के हाजी महबूब और सैयद एखलाक 8 जनवरी 2021 को हाईकोर्ट गए थे। हाईकोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने 9 नवंबर 2022 को इस पुनरीक्षण याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि दोनों याचिकाकर्ता बाबरी विध्वंस मामले के पीड़ित नहीं हैं।
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हाजी महबूब ने बुधवार को आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले की पुष्टि की है। कहा कि निचली अदालत के बाद हाईकोर्ट जाते हैं, फिर आखिरी रास्ता सुप्रीम कोर्ट ही बचता है। इसलिए अब हम शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट का रुख करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद का विध्वंस एक गंभीर अपराध था, इसके आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।