सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को अयोध्या के धन्नीपुर में मिली जमीन पर बनने वाली मस्जिद की डिजाइन खाना-ए-काबा की तर्ज पर चौकोर हो सकती है।
सऊदी अरब के मक्का में खाना-ए-काबा, जिसे हरम शरीफ भी कहा जाता है, की इस्लाम में बहुत अहमियत है। साथ ही यह इस्लामी संस्कृति की बेहतरीन पहचान भी है। इसे देखते हुए धन्नीपुर मस्जिद की डिजाइन को फाइनल किया जा सकता है। मस्जिद में कोई गुंबद व मीनार नहीं होगी।
इंडो इस्लामिक कल्चर फाउंडेशन ट्रस्ट के सचिव एवं प्रवक्ता अतहर हुसैन ने रविवार को बताया कि धन्नीपुर गांव में 15,000 वर्गफीट में मस्जिद बनाई जाएगी। यह रकबा बिल्कुल बाबरी मस्जिद के बराबर ही होगा। मस्जिद के लिए वास्तुशास्त्री नियुक्त किए गए प्रोफेसर एसएम अख्तर को मस्जिद की डिजाइन तय करने की पूरी आजादी दी गई है। उनकी ओर से तैयार डिजाइन पर ट्रस्ट के सदस्यों के साथ चर्चा की जाएगी।
प्रो. अख्तर कह चुके हैं कि इस मस्जिद की डिजाइन बाकी मस्जिदों से बिल्कुल अलग होगी। यह मक्का में स्थित काबा शरीफ की तरह चौकोर हो सकता है। हालांकि अभी इस बारे में कुछ भी तय नहीं हुआ है। इस सवाल पर कि क्या काबा शरीफ की ही तरह धन्नीपुर मस्जिद में भी कोई गुंबद या मीनार नहीं होगी, हुसैन ने कहा कि हां, ऐसा हो सकता है।
अतहर ने बताया कि देश-विदेश में जहां कहीं भी मस्जिदें स्थित हैं, उनका स्थापत्य उसी क्षेत्र विशेष या उसेबनाने वाले लोगों के वतन की मान्यताओं के अनुसार तय किया जाता था। मगर यह जरूरी नहीं है कि वह विशुद्ध इस्लामी ही हो। भारत में स्थित अधिकांश मस्जिदें तुर्क और पर्शियन डिजाइन पर अधारित हैं। काबा शरीफ इस्लामी आस्था की आदिकालीन इमारत है। लिहाजा धन्नीपुर मस्जिद का स्वरूप काबा जैसा हो तो वह बेहतर रहेगा।