कलाकारों ने किया कंस वध का जीवंत मंचन
लखनऊ। जैसे ही मंच पर भगवान श्रीकृष्ण ने शिव के विशाल धनुष का खंडन किया, अधर्म के प्रतीक कंस का सिंहासन डोल उठा। हर तरफ ''जय श्री कृष्णा'' का जयघोष सुनाई देने लगा। कोलकाता के भास्कर नाट्य कला केंद्र के कलाकारों ने कंस वध का जीवंत मंचन। इसे देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। ऐशबाग रामलीला मैदान में चैती महोत्सव के पांचवें दिन सोमवार को भक्ति, शक्ति और शरणागति का अनूठा संगम देखने को मिला। कलाकारों ने श्रीकृष्ण का मथुरा प्रवेश प्रसंग के मंचन से अत्याचार के अंत और जन-मानस की मुक्ति संदेश दिया। कृष्ण लीला की शुरुआत अक्रूर जी की उस भावुक यात्रा से हुई, जहां भक्ति और कर्तव्य के द्वंद्व के बीच उन्हें यमुना तट पर प्रभु के चतुर्भुज स्वरूप के दर्शन प्राप्त हुए। इससे पहले महोत्सव का शुभारंभ नृत्यांगनाओं की थिरकन और भक्ति गीतों से हुआ। अनुष्का श्रीवास्तव के संयोजन में ''स्वागतम कृष्णा'' और डॉ. राघवेंद्र प्रताप सिंह के निर्देशन में ''सत्यभामा का घमंड'' जैसी नृत्य नाटिकाओं में ब्रज की संस्कृति की झलक दिखी।
कलाकारों ने किया कंस वध का जीवंत मंचन
कलाकारों ने किया कंस वध का जीवंत मंचन
कलाकारों ने किया कंस वध का जीवंत मंचन
कलाकारों ने किया कंस वध का जीवंत मंचन
कलाकारों ने किया कंस वध का जीवंत मंचन
कलाकारों ने किया कंस वध का जीवंत मंचन
कलाकारों ने किया कंस वध का जीवंत मंचन
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