लखनऊ। देश के लिए जान दांव पर लगाकर शौर्य का परिचय देने वाले आठ जांबाजों को सेना मेडल (गैलेंट्री) अवाॅर्ड से नवाजा जाएगा। वहीं 11 को विशिष्ट सेवा पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। यह अवॉर्ड मध्य कमान अलंकरण समारोह में 13 जनवरी को छावनी स्थित गोरखा रेजिमेंटल सेंटर परेड ग्राउंड में मध्य कमान के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि प्रदान करेंगे।
मध्य कमान के पीआरओ शांतनु प्रताप सिंह ने बताया कि 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाएगा। पहली बार लखनऊ में यह आयोजन हो रहा है। इसी उपलक्ष्य में पांच जनवरी को नो योर आर्मी मेला सूर्या खेल परिसर में लगाया गया और अब 13 को अलंकरण समारोह हो रहा है। इसमें आठ जांबाजों को वीरता पुरस्कार और 11 को विशिष्ट सेवा पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। 17 इकाइयों को उनकी पेशेवर उत्कृष्टता के लिए यूनिट प्रशंसा के साथ-साथ पांच सूर्या कमांड ट्रॉफियां भी दी जाएंगी। उन्होंने बताया कि मेजर सुजय घोरपड़े, मेजर प्रशांत भट्ट, मेजर लालनगाइसांग वैफेई, मेजर हितेश खरायत, लेफ्टिनेंट कर्नल ध्रुव राजन और कैप्टन सिद्धार्थ शेखर को सेना मेडल (गैलेंट्री) और मेजर नीतीश त्यागी और मेजर ए रंजीत कुमार को बार टू सेना मेडल वीरता से अलंकृत किया जाएगा। बार टू सेना मेडल वीरता उन्हें दिया जाता है, जो दूसरी बार यह अवाॅर्ड पा रहे होते हैं।
सियाचिन की चौकियों को जोड़ा
-मेजर सुजय घोरपड़े
सियाचिन ग्लेशियर में बेले केबल टूटने के कारण तीन चौकियां पूरी तरह से संपर्क से कट गई थीं। अत्यधिक ऊंचाई के कारण एमआई-17 व एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर भी सहयोग नहीं कर पा रहे थे। ऐसी स्थिति में सतारा, महाराष्ट्र निवासी मेजर सुजय घोरपड़े ने खतरे की स्थिति को समझते हुए 18 हजार फीट की ऊंचाई पर आगे की उड़ान में अंडरस्लंग हवाई डिलीवरी के जरिए चौकियों को जोड़ने में अहम योगदान दिया।
अनंतनाग में आतंकवादी को किया ढेर
-मेजर प्रशांत भट्ट
वर्ष 2022 में जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिली। इसके बाद बागेश्वर, उत्तराखंड निवासी मेजर प्रशांत भट्ट ने जंगली इलाके में एक ऑपरेशन शुरू किया। एक आतंकवादी उन्हें राइफल के साथ नाले की ओर जाता दिखा जहां गोलीबारी भी हुई। इसमें उन्होंने आतंकवादी को ढेर कर अपने शौर्य व पराक्रम का परिचय दिया।
उग्रवादी को निपटाया, बरामद किया गोला-बारूद
-मेजर लालनगाइसांग वैफेई
मणिपुर के मेजर लालनगाइसांग वैफेई ने खुफिया सूचनाओं के आधार पर एक उग्रवादी संगठन के व्यक्ति को निष्क्रिय किया। उग्रवादी एक रात के लिए जहां रुका था, वहां ऑपरेशन चलाया गया। सैनिकों की मौजूदगी का आभास होने पर आतंकवादी ने गोलीबारी शुरू कर दी। ऑपरेशन में आतंकवादी को ढेर कर बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और युद्धक सामान बरामद किया।
मानव ढाल बनाकर छिपे उग्रवादियों को मार गिराया
-मेजर हितेश खरायत
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ निवासी मेजर हितेश खरायत ने मानव ढाल बनाकर पत्तों के बीच छिपे उग्रवादियों को ढेर कर दिया। उग्रवादियों ने उनकी टीम पर अंधाधुंध गोलीबारी भी की। लेकिन उन्होंने रणकौशल का परिचय देते हुए यह सुनिश्चित करते हुए कि मानव ढाल को कोई नुकसान न हो, उग्रवादियों को ढेर कर दिया और एक को जिंदा पकड़ा। दो असॉल्ट राइफलें, एक पिस्तौल और भारी मात्रा में युद्ध सामग्री बरामद की गई।
बड़े हमले की थी तैयारी, कर दी नेस्तनाबूद
-लेफ्टिनेंट कर्नल ध्रुव राजन
बात वर्ष 2022 की है। लेफ्टिनेंट कर्नल ध्रुव राजन उत्तरी कश्मीर में कंपनी कमांडर की ड्यूटी निभा रहे थे। खुफिया जानकारी से दो आतंकवादियों के होने की जानकारी मिली। उन्होंने योजना बनाई और उनके भागने के मार्गों को काटकर घेराबंदी की। इलाके से नागरिकों को चुपचाप बाहर निकाला, ताकि कोई अनहोनी न हो। इसके बाद घर के अंदर आतंकवादियों की गतिविधियों को देखा और स्नाइपर से आतंकवादी को मार गिराया गया। इस ऑपरेशन ने एक बड़े हमले को रोक दिया।
तीन आतंकियों को किया ढेर
-कैप्टन सिद्धार्थ शेखर शुक्ला
वर्ष 2022 में कैप्टन सिद्धार्थ शेखर शुक्ला ने मिशन लीडर के रूप में काउंटर टेरर ऑपरेशन की योजना बनाई और उसे क्रियान्वित किया। अदम्य धैर्य व असाधारण नेतृत्व प्रदर्शित करते हुए तीन कट्टर आतंकवादियों को ढेर किया, जिसके लिए उन्हें सेना पदक (वीरता) से सम्मानित किया जाएगा।
दूसरी बार मिलेगा सेना मेडल, गैलेंट्री
-मेजर नीतीश त्यागी
मेजर नीतीश त्यागी एक रणनीतिक उच्च मूल्य लक्ष्य के निगरानी मिशन को निडरता व संवेदनशील ढंग से अंजाम देने व सह-खतरे वाले क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वीरता पुरस्कार से अलंकृत किया जाएगा। उन्हें इससे पूर्व भी सेना मेडल गैलेंट्री मिल चुका है।
ऑपरेशन द्रौपदी का डांडा को दिया अंजाम
-मेजर ए. रंजीत कुमार
मूलरूप से तिरुपुर, तमिलनाडु के रहने वाले मेजर ए. रंजीत कुमार पर्वतारोहण और रेस्क्यू अभियानों के लिए जाने जाते हैं। वह एक प्रशिक्षक के रूप में तैनात थे, उन्हें लापता सदस्यों की खोज और बचाव में हिमस्खलन बचाव दल का नेतृत्व करने के लिए चुना गया। उन्होंने ऑपरेशन द्रौपदी का डांडा शुरू किया। इसमें 5530 मीटर की ऊंचाई पर 30 मीटर गहरी दरार में फंसे शवों की खोजकर उन्हें बरामद किया। ऐसा उन्होंने खुद को खतरे में डालकर किया। 27 नश्वर अवशेषों की सफल बरामदगी के लिए उन्हें दूसरी बार सेना मेडल गैलेंट्री दिया जा रहा है।