डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय
लखनऊ। तीन दिवसीय नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को नाटक लानत है का मंचन किया गया। इसमें किराएदारों की पहचान छुपाने की जद्दोजहद ने दर्शकाें को खूब ठहाके लगवाए। उत्तर प्रदेश दिवस के सिलसिले में केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली, संस्कृति विभाग और थियेटर एवं फिल्म वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से कैसरबाग स्थित इप्टा प्रेक्षागृह में नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन दबीर सिद्दीकी के निर्देशन में सजे नाटक लानत है का मंचन किया। नाटक एक मकान के सेठ कन्हैया लाल पर आधारित है। जो खोई हुई अपनी बेटी को तलाशने गया हुआ है। कन्हैयालाल के जाने के बाद उसके दो नौकर राहु और केतु सेठ कमरा किराए पर उठा देते हैं लेकिन किरायेदार दो होते हैं। एक किरायेदार दिन के लिए जो लड़का और दूसरा किरायेदार रात के लिए लड़की होती है। किरायेदार की पहचान छुपाने की जद्दोजहद शुरू होती है। यही जद्दोजहद दर्शकों को गुदगुदाती रहती है। आखिर में सेठ कन्हैयालाल के आने पर सभी रहस्यों से पर्दा उठ जाता है। मकान में किराएदार के रूप में रह रही लड़की कन्हैयालाल की खोई हुई बेटी निकलती है। मंच पर ऋषभ पांडेय, शशांक पांडेय, अनामिका सिंह, सनुज प्रजापति, कुलदीप श्रीवास्तव, सौरभ वर्मा, मिस्टर एस और मनोज त्यागी ने अभिनय किया।