रायबरेली। कुत्तों के काटने के बाद मरीजों को अब भटकना नहीं पड़ेगा। सीएमओ ने जिले के सभी 54 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर एंटी रैबीज क्लीनिक स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। सीएचसी अधीक्षकों को अपने क्षेत्रों की पीएचसी में जरूरी बंदोबस्त कराने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे गांव स्तर पर मरीजों को एंटी रैबीज वेनम (एआरवी) का सुविधा मिल सके।
जिले में कुत्तों के चपेट में आने के बाद मरीजों को एआरवी लगाने और इलाज के बंदोबस्त को उजागर करते हुए अमर उजाला ने विशेष अभियान चलाया। जिला अस्पताल और सीएचसी स्तर पर तो एआरवी लगाने की व्यवस्था है, लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।
कुछ पीएचसी पर लोगों को यह सुविधा मिल पा रही है। शासन ने पहले ही सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रैबीज क्लीनिक स्थापित कराने के आदेश दिए हैं, लेकिन अब तक विभाग के स्तर से प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
अमर उजाला के अभियान के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गंभीर रुख अपनाते हुए पीएचसी स्तर पर कुत्तों के चपेट में आने वाले लोगों को एआरवी की सुविधा मुहैया कराने के लिए क्लीनिक स्थापित कराने की कवायद शुरू कर दी है। पीएचसी स्तर पर यह क्लीनिक स्थापित होने के बाद लोगों को चपेट में आने के बाद इधर-उधर भागना नहीं पड़ेगा। आसानी से पीएचसी स्तर पर एआरवी लगवाने की सुविधा मिल सकेगी।
सीएमओ ने सभी सीएचसी अधीक्षकों को व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने के निर्देश दिए हैं। इससे जल्द ही सीएचसी स्तर पर लोगों को यह सुविधा दी जा सके।
जिला अस्पताल की क्लीनिक में बढ़ेंगी सेवाएं
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. महेंद्र मौर्या ने बताया कि कुत्तों के चपेट में आने के बाद मरीजों में एआरवी लगवाने के लिए क्लीनिक पहले से ही संचालित है। इस क्लीनिक को मॉडल बनाया जाएगा। ओपीडी के साथ ही इमरजेंसी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। एआरवी लगाने के साथ ही घाव की सफाई सहित अन्य सुविधाएं भी क्लीनिक में उपलब्ध होगी।
जिले की सभी पीएचसी में एंटी रैबीज क्लीनिक जल्द ही स्थापित होगी। जरूरी संसाधन जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। फ्रिज सहित अन्य संसाधनों की व्यवस्था होते ही क्लीनिक शुरू हो जाएगी। इस संबंध में अधीक्षकों को निर्देशित कर दिया गया है।
- डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ