अन्दर की बात ---
- रेलवे की एक बड़ी यूनियन के नेता हैं। रिटायर हो चुके हैं। उनकी खासियत है कि पूरी नौकरी नेतागिरी में काट दी। ईश्वर साक्षी हैं, मूल काम को जो उन्होंने छुआ भी हो। उन्हें तो शायद याद ही न रहा हो कि रेलवे ने किस काम के लिए उन्हें भर्ती किया था। पूरा जीवन रेलकर्मियों से ही दलाली खाते रहे। अब रिटायरमेंट के बाद रेलकर्मियों को ज्ञान देते फिर रहे हैं। काम की बारीकियां समझा रहे हैं। हाल ही में कहीं रेलकर्मियों को काम समझा रहे थे, लेकिन रेलकर्मी काम खुजलाते हुए निकल गए। वे बेचारे खिसिया गए...उनकी खिसियाहट की चर्चाएं इन दिनों आम हैं।