अवैध बालू खनन का कारोबार कई सालों से जिले में फलफूल रहा है। साल 2017 में अवैध बालू खनन में 212 करोड़ रुपये का जुर्माना खनन माफिया व उनके 32 साथियों पर लगा था। यह कार्रवाई भाजपा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह की शिकायत पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने की थी। इसके बाद से खनन का मामला बड़े पैमाने पर चर्चा में आया।
उस समय एनजीटी के जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने 36 सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया था। आदेश में यूपी सरकार सरकार को यह जुर्माना वसूलकर इसका इस्तेमाल पर्यावरण की बेहतरी में करने के निर्देश दिए गए। मामला तरबगंज तहसील के कल्याणपुर गांव से जुड़ा हुआ है। एनजीटी के आदेश पर गठित कमेटी ने एक रिपोर्ट दी थी, जिसमें कहा गया था कि गांव में 2011 से 2017 के बीच 23,88,229 घन मीटर अवैध बालू खनन किया गया। इसकी वजह से 93 करोड़ चार लाख 54 हजार रुपये का राजस्व का नुकसान हुआ।
उस समय के तत्कालीन जिलाधिकारी जेबी सिंह व लखनऊ से कई वरिष्ठ अधिकारियों वाली कमेटी ने 500 रुपये प्रति घन मीटर के हिसाब से अवैध खनन करने वालों से कुल 1,19,41,50000 रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना वसूले जाने की सिफारिश की थी, जिसके आधार पर एनजीटी ने आदेश जारी किया। जिसमें 212 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा और वसूली की कार्रवाई प्रशासन ने शुरू की। इसके बाद जुर्माना में शामिल लोगों ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली और वहां वसूली पर स्टे हासिल कर लिया।
खनन में हाफिज का चलता था सिक्का
जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र के ग्राम कल्यानपुर निवासी हाफिज अली का सत्ता के रसूख से बालू के अवैध खनन का सिक्का चलता रहा। बालू खनन का कारोबार हाफिज को पुश्तैनी धंधे के रूप में मिला था लेकिन उसने जब सत्ता के लोगों के शरण में रहकर कारोबार को बढ़ाया तो वह देखते ही देखते सफेद रेत के काले कारोबार का बादशाह बन गया। इस काले कारोबार को संरक्षण देने के लिए वह खुद सफेदपोश चोले में गया। उसने गांव में शानदार मकान बनवाने के साथ नवाबगंज कस्बे में एक इंटर कॉलेज बनवाया। इसके अलावा एक मैरेज हाल भी बनवा दिया।
इस काम में इसके भाई भी सहयोगी रहे, लेकिन जब लोकसभा का चुनाव हुआ तो हाफिज ने खुलकर एक नेता का समर्थन किया। इसके अलावा हाफिज अली की इस काली कमाई से कई लोगों को फायदा पहुंचता था। इसमें नेता, अधिकारी और पुलिस के लोग भी शामिल थे। बताया जाता है कि हाफिज अली ने जिसकी सत्ता के रसूख से अपने कारोबार को बढ़ाकर इतने व्यापक पैमाने पर किया था उन्हें वह चुनाव के दौरान बड़ी फंडिंग भी करता था। लेकिन जब इसके नाम से शिकायतें बढ़ी और मामले दर्ज हुए तो वह भूमिगत हो गया।
एनजीटी के आदेश पर अटैच हुई थी 12 करोड़ की संपत्ति
साल 2016 में ही एनजीटी की ओर से जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक की पेशी होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया था। तत्कालीन जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन को जिले के चकरसूल कल्याणपुर में हुए लाखों ट्रक बालू के अवैध खनन के मामले में कार्रवाई न होने को लेकर तलब किया गया था। जिलाधिकारी के निर्देश पर अवैध खनन माफिया हाफिज अली व उसके तीन भाइयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के साथ उन सबके नाम की करीब 12 करोड़ रुपये की चल-अचल सम्पत्तियों को कुर्क कर लिया था। इसके बाद एनजीटी की टीम ने खुद आकर चकरसूल में हुए अवैध खनन का जायजा लेकर मामले की सुनवाई शुरू की थी।
अब फिर खंगाली जाएंगी साल 2017 की फाइलें
साल 2017 में अवैध बालू खनन के मामले में कार्रवाई भले ही विधिक प्रक्रिया में है, लेकिन अब नई शिकायत होने पर प्रशासन हरकत में आ गया है। प्रकरण किस स्थिति में है और जांच में क्या-क्या तथ्य सामने आए थे, इसकी पूरी पड़ताल होगी। जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने संकेत दिया है कि पुराने मामले की भी छानबीन करके प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इससे हाफिज अली व उसके साथियों की मुश्किलें बढ़ने की उम्मीद बढ़ गई है। बीते कई सालों से मामले पर सभी चुप्पी साधे थे।