लखनऊ। कोविड अस्पताल बनाए गए डीआरडीओ और हज हाउस से राजधानी के सरकारी अस्पतालों में 26 वेंटिलेटर भेजे गए। हालांकि, दो अस्पतालों ने स्टाफ की कमी के चलते इनमें से आठ वेंटिलेटर लौटा दिए। दस वेंटिलेटर मैनपावर की कमी से धूल फांक रहे हैं। लोकबंधु व बलरामपुर अस्पताल में ही मिले वेंटिलेटर चल रहे हैं। उधर, सिविल अस्पताल ने तो अलॉट किए गए वेंटिलेटर लिए ही नहीं। इसका भी कारण मैनपावर न होना बताया जा रहा है।कोरोना की दूसरी लहर में हज हाउस व डीआरडीओ को कोविड हॉस्पिटल में तब्दील किया गया था। डीआरडीओ में 150 और हज हाउस में 25 वेंटिलेटर की व्यवस्था की गई। संक्रमण की रफ्तार थमने पर स्वास्थ्य महानिदेशालय के फैसले पर सभी वेंटिलेटर प्रदेशभर के अस्पतालों में भिजवा दिए गए। इनमें से 26 वेंटिलेटर डेढ़ माह पहले भाऊराव देवरस संयुक्त चिकित्सालय, रामसागर मिश्रा संयुक्त चिकित्सालय, लोकबंधु, रानी लक्ष्मी बाई संयुक्त चिकित्सालय, झलकारी बाई, डफरिन और बलरामपुर अस्पताल भेजे गए। हालांकि, लोकबंधु व बलरामपुर अस्पताल को छोड़ कहीं भी वेंटिलेटर चल नहीं पा रहे हैं। इसका कारण डॉक्टर व यूनिट चलाने वाले स्टाफ की कमी है।
सिविल ने तो लिए ही नहीं वेंटिलेटर
हज हाउस व डीआरडीओ से डफरिन और झलकारी बाई अस्पताल को चार-चार वेंटिलेटर मिले थे। हालांकि, कुशल विशेषज्ञ न होने से सीएमओ ऑफिस को ये लौटा दिए गए। उधर, मैनपावर न होने से सिविल अस्पताल ने अलॉट किए गए वेंटिलेटर लिए तक नहीं। रानी लक्ष्मी बाई अस्पताल की सीएमएस डॉ. संगीता टंडन का कहना है कि डॉक्टर व स्टाफ न होने से मिले दो वेंटिलेटर नहीं चल पा रहे हैं। रामसागर मिश्रा अस्पताल के सीएमएस डॉ. सुमित का कहना है कि सभी वेंटिलेटर इंस्ट्राॅल कर लिए गए हैं, पर डॉक्टर और स्टाफ के संकट से मरीज नहीं भर्ती किए जा रहे। सीएमओ डॉ. मनोज का कहना है कि किस वजह से वेंटिलेटर नहीं चल रहे हैं, इसकी जानकारी जुटाई जाएगी।
अस्पताल मिले वेंटिलेटर चल रहे
बीआरडी महानगर 4 0
रामसागर संयुक्त अस्पताल 4 0
रानीलक्ष्मीबाई अस्पताल 2 0
बलरामपुर 4 4
लोकबंधु 4 4
(डफरिन और झलकारी बाई अस्पताल ने मिले चार-चार वेंटिलेटर वापस कर दिए।)
पुराने वेंटिलेटर भी बंद पड़े
बलरामपुर अस्पताल में करीब 55 वेंटिलेटर हैं। हालांकि, इनमें से 15 पर ही मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। बाकी स्टाफ न होने से बंद पड़े हैं। लोकबंधु अस्पताल में 40 से से छह वेंटिलेटर पर ही मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। अस्पताल प्रभारियों का कहना है कि मैनपावर व विशेषज्ञ मिलने पर ही यूनिट का पूरी क्षमता से संचालन हो पाएगा।