लखनऊ। घरों से उठाया जाने वाला कूड़ा जमा करने के लिए राजधानी में 64 कॉम्पैक्टर लगाए गए हैं। इनमें से आधे पहले से खराब थे और बाकी कचरे से फुल होकर बुधवार को ठप हो गए। ईकोग्रीन कंपनी के कॉम्पैक्टरों को खाली न करने से कूड़ा सड़कों पर आ गया है। नगर निगम कर्मचारी लगवाकर इन्हें हटवा रहा है, लेकिन फिर भी हालात बुरे बने हुए हैं।शहर में जहां खुले कूड़ाघर थे, पांच साल पहले वहां कॉम्पैक्टर लगने शुरू हुए। दो साल पहले तक कई चरणों में कुल 64 कॉम्पैक्टर लगाए गए। इससे जो कूड़ा खुले में पड़ता रहता था, वह बंद मशीन में जाने लगा। शुरू में तो कॉम्पैक्टर सही से चले, लेकिन बाद में ये अवैध ठेलिया वालों से वसूली का अड्डा बन गए। चीनी कंपनी ईकोग्रीन नगर निगम से हर महीने पांच से छह करोड़ रुपये टिपिंग फीस के रूप में लेती रही, लेकिन कॉम्पैक्टरों की मरम्मत में लापरवाही बरतती रही। इससे आधे कॉम्पैक्टर एक साल से अधिक समय से खराब पड़े हैं। बाकी भी बुधवार को ठप हो गए।
यह स्थिति इसलिए आई, क्योंकि नगर निगम से विवाद के बीच ईकोग्रीन वालों ने मंगलवार रात को कॉम्पैक्टर शिवरी प्लांट ले जाकर खाली नहीं किए। इससे बुधवार को नगर निगम मुख्यालय के चंद कदम दूर जनपथ मोड़, हजरतगंज में लारेंस टेरस, चिड़ियाघर सहित शहर के सभी कॉम्पैक्टर ठप हो गए। बुधवार सुबह सफाई कर्मचारी कूड़ा डालने पहुंचे तो कॉम्पैक्टर ठप मिले। ऐसे में कर्मचारी आस-पास के इलाकों से निकला कचरा सड़क पर ही डाल गए। नगर निगम ने ट्रैक्टर ट्रालियों से एक बार इसे उठवाया, लेकिन थोड़ी देर बाद फिर कूड़ा आ जाने से वही स्थिति हो गई। नगर निगम के पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान का कहना है कि फिलहाल ट्रैक्टर ट्राली और छोटी गाड़ियां लगवाकर कॉम्पैक्टरों के बाहर लगे कूड़े के ढेर उठवाए जा रहे हैं। ईकोग्रीन के वेंडरों की गाड़ियां लेकर कॉम्पैक्टर खाली कराए जाएंगे। अपर नगर आयुक्त पंकज सिंह का कहना है कि कई जगह से कॉम्पैक्टर ठप होने की शिकायत मिली है। सभी जोनल सिनेटरी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कर्मचारी लगाकर इनके बाहर जमा कचरे का निस्तारण कराएं।