समय के साथ सिपहसालार भी मुंह फेर लेते हैं। कुछ ऐसा ही पुलिस महानिदेशक मुख्यालय में हुआ है।
यहां सत्ता के करीबी एक बड़े प्रभावशाली अफसर से सरकार नाराज हो गई और उन्हें हटा दिया गया। जब तक वह पावर में थे, उनके खास लोगों का सीना खुद-ब-खुद दो इंच अधिक फूला रहता था।
विभाग के ही लोग जब आला अफसर से कोई काम होता था, तो इन मातहतों का चेहरा देखते थे।
साहब का मूड कैसा है और वह काम करेंगे या नहीं, इस पर भी मातहतों की ही राय खास होती थी।
लेकिन राजा के गिरते ही सिपहसालार भी ढेर हो गए हैं। अब सिपहसालार अपने लिए अलग रास्ते देख रहे हैं।
कोई किसी अफसर के साथ जुड़ने की कोशिश में है तो कोई किसी अफसर के साथ।