जुबान खोली, तो जेल जाओगे, नियम बताओगे तो रेल जाओगे। नजर मिलाओगे तो बत्ती उतरेगी और आंख दिखाओगे तो रासुका में जाओगे।
दुम हिलाओगे तो मलाई वाली पोस्टिंग पाओगे, पिता तुल्य बताओगे तो मां तक पहुंचोगे। सचिवालय में आजकल ये जुमला खासा चर्चा में है।
बगैर किसी का नाम लिए ये जुमला कहीं तनाव, कहीं मजाक तो कहीं नसीहत के रूप में सुनाया जा रहा है।
जुमला सामने आते ही महाबंद शुरू हो जाती है। दिलचस्प ये है कि चर्चा बारे-बारे अफसरों के चैंबर तक पहूंच गई है।