नरेंद्र मोदी की आगरा रैली को लेकर वाकई भाजपाइयों के पसीने छूट रहे हैं। हर बार तो रैली के बाद तीन लाख से ज्यादा भीड़ वाला प्रेस नोट काम कर जाता था।
इस बार मामला जरा टेढ़ा फंस गया है। उसी दिन सपा की भी बरेली में रैली है। जाहिर है कि काम सिर्फ दावे करने से नहीं चलेगा, बल्कि भीड़ भी जुटानी होगी।
बेचारे भाजपाइयों को पसीना छूट रहा है। कहीं भीड़ कम जुटी तो क्या होगा?
उधर, नेताजी की टीम भी पूरी ताकत लगाए हुए है कि पश्चिम की इस पट्टी में मोदी को किसी भी तरह पटकनी दे दी जाए, जिससे आगे का काम आसान हो जाए।