अपने एक वजीर हैं। अवध क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं। जिससे भी मिलते हैं अपने को ‘डेड ऑनेस्ट’ बताते हैं।
उनके विभाग में निदेशक के चार पद एक समान हैं। विभाग के लोग इन पदों में से एक को मलाईदार, दूसरे को भी कमाई वाला और बाकी दो को तन्हाई वाला बताते हैं।
मलाईदार कुर्सी पर डेड ऑनेस्ट मंत्री जी की कृपा से जूनियर मोस्ट काबिज हैं, तो कमाई वाले पर बीच वाले को मौका दिया गया है।
ऑनेस्टी में खुद को उत्कर्ष पर होने का दावा करने वाले निदेशक की तन्हाई वाली कुर्सी ने चैन छीन लिया है।
उन्होंने मान न मान मैं तेरा मेहमान टाइप में जांच-पड़ताल की मुहिम छेड़ी, लेकिन मकसद में कामयाब नहीं हुए।
उल्टा खुद जांच से घिर गए। मलाईवाले और कमाईवालों की असली ताकत का अंदाजा ठीक से होता, उसके पहले उन्हें तन्हाई वाली दूसरी कुर्सी पर भेज दिया गया।
अब वह फड़फड़ाते हुए दर्द बयां करते घूम रहे हैं कि वह मलाईवाली कुर्सी कमाई के लिए नहीं, अन्नदाताओं के भविष्य की खातिर सफाई के लिए चाहते थे।
लेकिन वजीर ने डिपार्टमेंट को डेड करने के लिए उनकी विदाई का बंदोबस्त शुरू कर दिया है।