यह साहब का डर है या उनकी फितरत। वे किसी पर भी विश्वास नहीं करते हैं। हम बात कर रहे हैं, एक ऐसे विभाग के मुखिया की जो लोगों को तीर्थ यात्राएं कराते हैं।
साहब के अविश्वास का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे अपने पर्सनल स्टाफ पर भी भरोसा नहीं करते हैं।
कोई भी काम बताते हैं तो उसमें दस सवाल भी पूछते हैं। उनकी आदत से पूरा विभाग परेशान हैं। साहब ऐसी पोस्ट पर हैं कि उनकी अवहेलना भी नहीं की जा सकती।
इसलिए विभाग के कर्मचारी हमेशा उनसे बचने की कोशिश में लगे रहते हैं। साहब के पीएस तक उनका काम करने से कन्नी काट जाते हैं।
एक कर्मचारी कहते हैं कि काम करने से कोई दिक्कत नहीं है लेकिन साहब के दस सप्लीमेंट्री सवालों का जवाब कौन देगा?