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पहले मौसम, अब कोरोना से बेजार आम का कारोबार

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लखनऊ/मलिहाबाद। फलपट्टी के बागबानों के लिए यह वर्ष बेहद खतरनाक साबित हुआ। शुरू के दिनों में अधिक ठंठ, बारिश और ओलावृष्टि ने फसल को बर्बाद किया। बागबानों के अनुसार बची हुई 25 प्रतिशत फसल मई के आखिरी सप्ताह में तैयार हो जाएगी। मगर, कारोबार पर कोरोना का कहर हावी होता दिख रहा है। विशेषज्ञों का यह अनुमान है कि जून व जुलाई में कोरोना का संक्रमण चरम पर होगा। यदि ऐसा हुआ तो बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान होगा, क्योंकि मुख्य व्यवसाय होने की वजह से यहां के लगभग 90 फीसदी लोग इस कारोबार जुड़े रहते हैं। मैंगो ग्रोवर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंशराम अली बताते हैं कि मौजूदा हालात और बागबानों की मदद के लिए केंद्रीय मंत्री को एक पत्र भी लिखा है। सरकार से राहत मिली तो ठीक, वरना कारोबार तो दांव पर है। क्षेत्र के बड़े बागबान व दिल्ली मंडी से जुड़े मीनू वर्मा बताते हैं कि पूरे फलपट्टी क्षेत्र की दशहरी की दिल्ली में बड़ी मांग रहती है। मगर हालात को देखते हुए वहां आम पहुंचेगा तो बिकेगा या नहीं, इसपर कुछ कहना संभव नहीं है। आम के आढ़ती हाफिज हलीम के मुताबिक दिल्ली के बाद सबसे ज्यादा आम महाराष्ट्र की मंडी में जाता है, लेकिन वहां पर भी कोरोना संक्रमण से वहां की मंडी से भी ज्यादा राहत की उम्मीद नहीं है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र मंडी के लोकल आढ़तियों से इस विषय पर बात होती है, लेकिन कोरोना के चलते वह भी कारोबार को लेकर आश्वस्त नहीं दिखते। मलिहाबाद की स्थानीय मंडी के अध्यक्ष नसीम बेग के मुताबिक दिल्ली, मुंबई के बाद पंजाब, जम्मू, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, बंगाल, ओडिशा सहित देश के हर प्रदेश में आम का निर्यात किया जाता है। आम का सीजन शुरू होने के साथ ही अन्य प्रदेशों से व्यापारी यहां की मंडी में आ जाते हैं और आम खरीद कर अपने राज्य में भेजते हैं। लेकिन इस बार उनके आने की भी उम्मीद बहुत कम है।
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