लखनऊ। कोरोना वायरस की वजह से केजीएमयू की पीजी की 15 सीटों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पांच विभागों की ये सीटें लिंब सेंटर को कोविड हॉस्पिटल बनाने से प्रभावित होंगी। आधारभूत सुविधाएं नहीं होने की स्थिति में एमसीआई की टीम निरीक्षण के दौरान इन सीटों को आगे मान्यता देने से इनकार कर सकती है। लिंब सेंटर में आर्थोपेडिक्स, रिह्यूमेंटोलॉजी, फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (पीएमआर) विभाग चल रहा है। इसके अलावा पीडियाट्रिक आर्थोपेडिक्स, स्पोर्ट्स मेडिसिन सालभर पहले शुरू हुए हैं। आर्थोप्लास्टी और स्पाइन सर्जरी के लिए अलग से विभाग बनाया जा रहा है। अब कोरोना वायरस आने पर केजीएमयू प्रशासन लिंब सेंटर को कोविड हॉस्पिटल में तब्दील करने की तैयारी में है। स्थिति में इन सभी विभागों को अन्य स्थानों पर शिफ्ट किया जाएगा। बड़ी संख्या में बेड और अन्य मशीनों का तत्काल संचालन शुरू होना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में अगस्त में होने वाले मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम के निरीक्षण के दौरान ये विभाग अपने संसाधन नहीं दिखा पाएंगे।
आर्थोपेडिक्स विभाग में पीजी की सीटें 12 से बढ़कर 18 हुई हैं। रिह्यमेंटोलॉजी में दो से बढ़कर चार हुई हैं। पीएमआर को चार मिली हैं। दो बढ़ाने की तैयारी है। इसी तरह पीडियाट्रिक आर्थोपेडिक्स और स्पोर्ट्स मेडिसिन भी पीजी की सीटों के लिए दो-दो सीटों और स्पाइन सर्जरी की एक सीट के लिए आवेदन करने की तैयारी में है। जुलाई- अगस्त में एमसीआई की टीम यहां निरीक्षण करेगी। बेड, लैब सहित सुविधाएं मुकम्मल मिली तभी सीटों की मान्यता मिलेगी। अन्यथा पहले से चल रही सीटें घट सकती हैं।
केजीएमयू के मीडिया प्रभारी डॉ. सुधीर सिंह का कहना है कि विभागों को उनके मूल स्थान से अभी हटाया नहीं गया है। यदि उन्हें कहीं शिफ्ट किया जाएगा तो केजीएमयू प्रशासन दूसरे स्थान पर संसाधन उपलब्ध कराएगा। केजीएमयू प्रशासन किसी भी कीमत पर सीटें घटने नहीं देगा।