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Lucknow News: अति गंभीर मरीजों को भी नहीं मिल रहीं एडवांस एंबुलेंस

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हिमांशु अवस्थी
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अति गंभीर मरीजों को भी सुरक्षित तरीके से एक से दूसरे अस्पताल पहुंचाने के लिए एडवांस लाइफ सपोर्ट वाली एंबुलेंस नहीं मिल पा रहीं हैं। किसी का वेंटिलेटर खराब है तो किसी की बैट्री सपोर्ट नहीं कर रही। ऐसे में एडवांस एंबुलेंस भी मरीजों को बेसिक सुविधाओं के साथ ही अस्पताल पहुंचा रहीं हैं। अलग-अलग अस्पतालों में खड़ी एंबुलेंस के चालकों से वेंटिलेटर सपोर्ट पर मरीज को ले जाने की बात पूछी गई तो सच सामने आया।
एंबुलेंस नंबर - यूपी 32 बीजी 8142
स्थान- बलरामपुर अस्पताल
रिपोर्टर- अस्पताल के आईसीयू में एक मरीज है, उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर ट्रॉमा ले जाना है।
एंबुलेंस चालक- एंबुलेंस में वेंटिलेटर सपोर्ट नहीं कर रहा है, उसकी बैटरी में कुछ गड़बड़ी है।
रिपोर्टर- मरीज गंभीर है, कोई दूसरी एंबुलेंस बुला दो।
एंबुलेंस चालक- कंट्रोल रूम के नंबर पर कॉल कर लें, डॉक्टर से बात कराने के बाद एंबुलेंस आएगी।
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एंबुलेंस नंबर - यूपी 41 जी 3879
स्थान- केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर
रिपोर्टर- ट्रॉमा कैजुअल्टी में मरीज वेंटिलेटर पर है, लोहिया ले जाना है।
एंबुलेंस चालक- यह एंबुलेंस सीतापुर जिले से मरीज को लाई है।
रिपोर्टर- मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर था क्या?
एंबुलेंस - नहीं, बेसिक सपोर्ट पर आया था।
रिपोर्टर- आप की एंबुलेंस का वेंटिलेटर ठीक हो तो छोड़ दीजिए।
एंबुलेंस - वेंटिलेटर में कुछ तकनीकी खामी है, जिस वजह से नहीं चल रहा।
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250 एडवांस एंबुलेंस का बेड़ा
अति गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए शासन ने 250 एडवांस एंबुलेंस उपलब्ध करा रखी हैं। इनकी तादाद अभी बढ़ाई जानी है। लखनऊ जिले में करीब चार एडवांस लाइफ सपोर्ट वाली एंबुलेंस चल रही हैं। ये बलरामपुर अस्पताल, चिनहट, बीकेटी व सरोजनीनगर इलाके पर खड़ी रहती हैं। इन एंबुलेंस की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी सीएमओ की है। मगर मॉनिटरिंग न होने से मरीजों को इसका पूरी तरह से लाभ नहीं मिल पाता है।
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सामान्य मरीजों को अस्पताल पहुंचाकर पूरा हो रहा कोटा
एएलएस एंबुलेंस सामान्य मरीजों को अस्पताल पहुंचाकर अपना कोटा पूरा कर रही है। एंबुलेंस चालकों का तर्क है कि अस्पताल के डॉक्टर ही मरीज को ट्यूब नहीं डालते हैं। मजबूरी में मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर ही अस्पताल ले जाना पड़ता है।
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खामियों को कराएंगे दूर
एडवांस लाइफ सपोर्ट की एंबुलेंस में वेंटिलेटर ठीक नहीं हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी। जो भी खामियां होंगी उन्हें दूर कराया जाएगा, ताकि मरीजों को परेशानी न होने पाए।
- डॉ. मनोज अग्रवाल, सीएमओ
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