कई स्थानों पर तटबंध बना चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। मानसून सक्रिय होते ही जिले के लोगों को बाढ़ का डर सताने लगता है। लोगों को बाढ़ से बचाने के लिए प्रशासन स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। जबकि तटबंध का निर्माण कार्य अधूरा होने से कुछ क्षेत्रों में बाढ़ की आशंका है। इतना ही नहीं पूर्व की खामियां भी दूर करने का प्रयास नहीं किया गया।
नेपाल से निकलने वाली राप्ती नदी जिले में बाढ़ का तांडव मचाती है। इससे बचने के लिए बाढ़ खंड की ओर से तटबंधों का निरीक्षण करने के साथ ही अन्य बचाव कार्यों की तैयारी की जा रही है। बाढ़ क्षेत्रों में निगरानी के लिए 18 बाढ़ चौकियां बना कर वहां प्रभारियों की तैनाती की गई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के लिए 66 बाढ़ शरणालय बनाए गए हैं। जहां बाढ़ पीड़ितों के लिए भोजन बनाने, बिस्तर, दवा व अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए दो कंपनी फ्लड पीएसी व दो बटालियन एनडीआरएफ की मांग भी जिला प्रशासन ने की है। राहत व बचाव कार्य के लिए 178 आपदा मित्र, प्रत्येक स्कूल के एक शिक्षक व प्रत्येक गांव से चार लोगों को प्रशिक्षित कर तैयार किया गया है।
करीब 45 किलोमीटर है तटबंध
जिले को बाढ़ से बचाने के लिए दो तटबंधों का निर्माण कराया गया है। इसमें परसा डेहरिया से तिलकपुर तटबंध 22.400 किलोमीटर लंबा बनाया गया है। जबकि खजुहा झुनझुनिया से अंधरपुरवा तक 22.500 किलोमीटर लंबा तटबंध बनाया गया है। लेकिन इन पर जहां तहां थोडे़ काम अधूरे होने से लोगों को बाढ़ से जूझना पड़ता है। वहीं जमुनहा के त्रिकुन्नी से सरयू नहर तक बने चार किलोमीटर बंध अक्सर बाढ़ व बरसात में फतेहुपर बनगई के श्मशान घाट के निकट, टिकुइया गांव के निकट सहित करीब दस जगह क्षतिग्रस्त हैं। जहां प्रतिवर्ष बाढ़ के दौरान इसे कटने से बचाने के लिए राहत व बचाव कार्य किया जाता है। लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं हो रहा है।
यह गांव होते हैं बाढ़ से प्रभावित
राप्ती नदी में बाढ़ आने से जमुनहा क्षेत्र के गजोबरी, बंदरा, मोहनपुर, कोठारपुरवा, कथरा, बीरपुर लौकिहा, शिकारी चौड़ा, हरिहरपुर, महराजनगर, बरूआ, गुरूदत्तपुरवा, पिपराकोठी, जोगिया, लक्ष्मनपुर सेमरहनिया गांव प्रभावित होते हैं। वहीं हरिहरपुररानी क्षेत्र के तिलकपुर, किशुनपुर चंदनभारी, मधवारपुर, सर्रा, भौसाएं, सहित अन्य गांव प्रभावित होते हैं। गिलौला क्षेत्र के पुरुषोत्तमपुर, सिसवारा, भरथापुर, केरवनिया, रामपुर त्रिभौना, गौहनिया, रामगढ़ी, सिहनिया, पहलादा विशुनापुर, पकड़िया, कचनापुर व अमवा गांव के लोग बाढ़ की विभिषिका झेलते है। इकौना क्षेत्र के जगरावल गढी, कोड़री दीगर, रमनगरा, रामपुर कटेल, दहावर कला, मनोहरापुर, अंधरपुरवा, शिवाजोत, मलौनाखसियारी, नरायनजोत, बुटहा, खरगौरा गनेश, राजगढ गुलहरिया के ग्रामीणों को बाढ़ का दंश झेलना पड़ता है।
क्षतिग्रस्त तटबंध पीडब्ल्यूडी की सड़क है। उसके रखरखाव व मरम्मत की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी की है। हमारे जिन तटबंध पर गड्ढे आदि बन गए थे उनकी मरम्मत कराने के साथ ही रेगुलेटर आदि की ग्रीसिंग-पेंटिंग कराई जा रही है। जिससे बाढ़ के दौरान कहीं कोई परेशानी न हो। - केएम लाल, सहायक अभियंता बाढ़ खंड