लखनऊ। एलडीए के तत्कालीन वीसी समेत अफसरों, अभियंताओं के गोमती की 6070 वर्गमीटर निष्प्रोज्य जमीन के बदले 100 करोड़ के विकसित भूखंड के समायोजन के खुलासे के डेढ़ माह बाद भी जांच एक इंच नहीं बढ़ सकी है। फर्जीवाड़ा करने वालों पर एफआईआर तक नहीं दर्ज कराई गई है। अब शासन ने घोटाला की जांच वाली फाइल को तलब किया है।
यह फर्जीवाड़ा राजगंगा डवलपर्स कंपनी के संचित अग्रवाल व अन्य ने किया था। गोमतीनगर थाने के उपनिरीक्षक ऋषि विवेक ने छह नवंबर को एलडीए सचिव को पत्र लिख कर शासन की मंशा से अवगत करा दिया है। सीएम कार्यालय ने गृह विभाग के जरिये घोटाले की जांच रिपोर्ट तलब की है।
सात दिन में एफआईआर का था दावा
एलडीए ने घोटाले के खुलासे के डेढ़ माह बाद भी कोई सुध नहीं ली, जबकि सात दिन में गोमतीनगर थाने में एफआईआर कराने का दावा किया था। एलडीए के अफसर ने बताया कि राजनेता से ताल्लुक रखने वाली राजगंगा डवलपर्स कंपनी के आरोपी प्रकरण को दबाने का दबाव बनाने के लिए दस्तक दे रहे हैं। इस कारण ही कार्रवाई नहीं हो पा रही है। थाने का पत्र एलडीए पहुंचा तो एक बार फिर घोटाले में संलिप्त अफसरों-अभियंताओं को जेल जाने का डर सताने लगा है।