रायबरेली। जिले की नहरों में भरपूर पानी नहीं छोड़े जाने से किसानों के सामने सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो गई है। मौजूदा समय में गेहूं, सरसों और आलू की फसल पानी के बगैर बेकार हो रही है। सिंचाई विभाग के अफसर केवल नहरों की तली में पानी दौड़ा रहे हैं। इससे किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है।
जिले में 435 नहरों हैं। इन नहरों से करीब तीन लाख किसान सिंचाई करते हैं। मौजूदा समय में गेहूं की फसल की बोआई किए एक महीने से ज्यादा का समय बीत गया है। अब सिंचाई के लिए पानी की जरूरत है। नहरों की सिल्ट सफाई का काम पूरा हुए दो महीने का समय बीत गया, लेकिन किसी नहर में क्षमता से पानी नहीं पहुंचा।
डलमऊ पंप कैनाल से जुड़ी नहरों में सबसे ज्यादा समस्या है, क्योंकि पंप पूरी क्षमता से नहीं चल रहे हैं। मौजूदा समय में सात पंप चलाने की मांग है, लेकिन कभी तीन तो कभी चार पंप चलाए जा रहे हैं।
2200 किमी तक फैली हैं नहरें
जिले में छोटी और बड़ी 435 नहरें हैं, जिनकी लंबाई करीब 2200 किलोमीटर है। ज्यादातर किसान नहरों के पानी से फसलों की सिंचाई करते हैं। जिन किसानों के पास निजी नलकूप की सुविधा है, वह लोग तो किसी तरह सिंचाई कर लेते हैं। जिनके पास सिंचाई का मुख्य जरिया नहर का पानी है, उनकी फसलें सूख रही हैं।
नहरों के पानी पर निर्भर है खेती
किसान महेश यादव ने बताया कि परिवार चलाने का मुख्य जरिया खेती है, जो नहर के पानी पर निर्भर है। कहने को पानी तो छोड़ा गया, लेकिन इतना कम पानी है कि कुलाबे से खेत में पानी नहीं पहुंच रहा है। शिव प्रकाश मिश्र ने बताया कि गेहूं की बोआई किए एक महीने से ज्यादा का समय बीत गया। फसल में पहली सिंचाई 25 दिन के अंदर हो जानी चाहिए, लेकिन पानी के अभाव में फसल सूख रही है।
मांग के सापेक्ष नहीं मिल रहा पानी
डलमऊ पंप कैनाल से सात पंप चलाने की डिमांड भेजी गई है, लेकिन मांग के हिसाब से पंप नहीं चलाए जा रहे हैं। कभी तीन तो कभी चार पंप चलाए जा रहे हैं। इससे क्षमता से कम पानी मिल रहा है। मांग के सापेक्ष पंप चलाने के लिए सिंचाई खंड छह को लिखापढ़ी की गई है।
हेमंत कुमार वर्मा, सिंचाई खंड दक्षिणी