आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने तथा केंद्र सहायतित योजनाओं में गड़बड़ी के आरोपी पावर कॉर्पोरेशन के तीन दर्जन से ज्यादा अभियंताओं पर शिकंजा कस गया है। कॉर्पोरेशन ने ऐसे आरोपी अभियंताओं की जांच संबंधी फाइल तलब की है। सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट का परीक्षण अंतिम दौर में है। एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि कार्रवाई की पूरी तैयारी कर ली गई है। जल्द ही कुछ की बर्खास्तगी व निलंबन के आदेश जारी कि ए जा सकते हैं।
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के निर्देश के बाद पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत दागी अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज करने जा रहा है। इसकी शुरुआत बीती 15 फरवरी को दक्षिणांचल विद्युत निगम के अधिशासी अभियंता ओम प्रकाश की बर्खास्तगी के साथ कर दी गई है। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार मौजूदा समय में 37 अभियंताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच चल रही है।
मुख्य से अधिशासी अभियंता तक के अफसरों पर शिकंजा
जिन अफसरों पर शिकंजा कसा है, उनमें मुख्य अभियंता से लेकर अधिशासी अभियंता तक के अधिकारी शामिल हैं। इनमें ज्यादातर पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत नोएडा व गाजियाबाद, दक्षिणांचल वितरण निगम में अलीगढ़, मध्यांचल वितरण निगम के लेसा व केस्को में लंबे समय तक तैनात रहे हैं। इसी दौरान सौभाग्य व दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना जैसी केंद्र सहायतित योजनाओं में भ्रष्टाचार का आरोप है।
ईओडब्ल्यू से भी जांच, कई पर आरोप सिद्ध
11 अभियंताओं के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति जांच चल रही है। पांच की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। अभियंताओं पर पिछली सरकार में मनमाने ढंग से ठेके देने, बिजली के बिलों में संशोधन के नाम पर मोटी उगाही करने, निर्माण कार्यों में गड़बड़ी, बड़े उपभोक्ताओं के कनेक्शन देने में खेल करने समेत तमाम अन्य तरह केआरोप हैं। विभागीय सतर्कता इकाई के अलावा सतर्कता अधिष्ठान व आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) से जांच कराई गई है। कई पर आरोप सिद्ध पाए गए हैं। जांच एजेंसियों ने गलत तरीके से अर्जित की गई संपत्तियों का ब्योरा भी जुटाया है।