लखनऊ। भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने के लिए औपनिवेशिक प्रभावों से मुक्त होकर उसका नए सिरे से मूल्यांकन करना जरूरी है। मंगलवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग की ओर से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने यह विचार रखा। डीपी मुखर्जी सभागार में प्रो. आभा अवस्थी की स्मृति में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा एवं आधुनिकता’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी और कुलपति प्रो. जेपी सैनी मौजूद रहे। मुख्य वक्ता प्रो. मनोज जेना ने ज्ञान प्रणाली के विऔपनिवेशीकरण पर जोर दिया। प्रो. नीतू सिंह ने विश्व सभ्यता के विकास में भारतीय ज्ञान परंपरा के योगदान को रेखांकित किया। प्रो. जया श्रीवास्तव और प्रो. सत्येंद्र त्रिपाठी ने भी विचार रखे। इस अवसर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जेआरएफ शोधार्थियों को पदक देकर सम्मानित किया गया।