पूर्णम में दिखी पिता-पुत्र की मार्मिक कहानी
लखनऊ। दर्पण संस्था की ओर से शनिवार को विश्वेश्वरैया प्रेक्षागृह में नाटक ‘पूर्णम’ का मंचन किया गया। शुभदीप राहा के निर्देशन में प्रस्तुत नाटक ने अन्याय, पारिवारिक रिश्तों, त्याग और परिस्थितियों के सामने मनुष्य की विवशता को प्रभावी ढंग से सामने रखा। कहानी नीलकंठ की है, जो गलत पहचान और अन्यायपूर्ण परिस्थितियों के कारण वर्षों तक परिवार से दूर रहता है। परिवार के प्रति उसका प्रेम और जिम्मेदारी कभी कम नहीं होती। लौटने पर उसे अतीत के सच के साथ अपने बिछड़े रिश्तों को फिर से जोड़ने की चुनौती मिलती है। पद्मश्री डॉ. अनिल रस्तोगी ने नीलकंठ की भूमिका को जीवंत किया। चित्रा मोहन, अलका विवेक और अम्बरीश बॉबी ने भी प्रभावी अभिनय किया।
पूर्णम में दिखी पिता-पुत्र की मार्मिक कहानी
पूर्णम में दिखी पिता-पुत्र की मार्मिक कहानी
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