लखनऊ। सेंट्रल बार एसोसिएशन के पदाधिकारी अदालती कार्य का बहिष्कार कर रहे हैं। ऐसे में एनआईए कोर्ट ने वकीलों द्वारा अदालती कार्य में बाधा डालने पर एक अप्रैल से जेल में ही एक मामले की सुनवाई करने का आदेश पारित कर दिया है।
गौरतलब हो कि सेंट्रल बार एसोसिएशन की ओर से एक प्रस्ताव पारित कर कहा गया था कि एससी/एसटी एक्ट के जज दिनेश कुमार मिश्र और एनआईए कोर्ट के जज विवेकानंद शरण त्रिपाठी द्वारा असहयोग व अमर्यादित टिप्पणी करने के कारण वकील आंदोलन करेंगे। बार एसोसिएशन की ओर से जारी प्रस्ताव में कहा गया कि वकीलों की समस्याओं के प्रति न तो इन अदालतों के जज सजग हैं और न ही जनपद न्यायाधीश ही समस्याओं के निराकरण को लेकर रुचि ले रहे हैं।
बताते चलें कि एनआईए के एक मामले में सुनवाई के समय गवाह से जिरह के लिए बचाव पक्ष के वकील के कोर्ट में हाजिर न होने एवं प्रदर्शन किए जाने को इस कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने न्यायालय कार्य में बाधा माना। उन्होंने मामले को अवमानना मानते हुए प्रकरण हाईकोर्ट को भेजने की सिफारिश की है। कोर्ट ने कहा कि वकील ट्रेड यूनियन जैसी कार्यशैली अपना रहे हैं।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हाईकोर्ट ने मामले के शीघ्र निस्तारण के लिए आदेश दिया है। ऐसे में एक अप्रैल से जनपद कारागार में गवाह से जिरह किया जाना उचित होगा ताकि साक्षी के उपस्थित रहने पर जिरह हो सके। ऐसे में जेल परिसर में उचित स्थान, कुर्सी, मेज, स्टेशनरी, सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में आदेश की प्रति जिला कारागार के अधीक्षक को भेजी जाए। कोर्ट ने कहा कि इस आदेश की प्रति जनपद न्यायाधीश को भेजते हुए पुलिस कमिश्नर लखनऊ को भी इस आशय से भेजी जाए कि वह वाहन मय चालक तथा सुरक्षा व्यवस्था करने की कार्रवाई करें।