बीते 25 साल से वे पारंपरिक देसी खाना, मोटा अनाज ढूंढ रहे हैं, लोगों को इसके बारे में बता रहे हैं, उन्हें इसके लिए पद्मश्री सम्मान मिल चुका है। लोग उन्हें पद्मश्री डॉ. खादर वली के नाम से कम मिलेट्स मैन के नाम से ज्यादा जानते हैं। डॉ. वली रविवार को राजधानी में इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स इंडिया (इंडिया) यूपी स्टेट सेंटर के मेहमान थे। इस दौरान उन्होंने एक सत्र को संबोधित किया।
अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि अमेरिका में एक छह साल की बच्ची में मासिक धर्म की प्रक्रिया शुरू होने के बाद उन्होंने खानपान को लेकर एक शोध शुरू किया और देखते ही देखते वे मिलेट्स मैन बन गए। डॉ. वली कहते हैं कि मैं अमेरिका में था। वहां जब छह साल की बच्ची में मासिक धर्म होने की जानकारी मिली तो शोध शुरू किया। परिणाम में पता चला कि कृत्रिम दूध और अन्न के सेवन से हार्मोन के असंतुलन की समस्याएं बढ़ रही हैं। डॉ. वली ने कहा कि हम सिर्फ सफेद चावल और गेहूं पर निर्भर होकर रह गए हैं। जबकि 3000 से अधिक अन्न उपजाए जा सकते हैं। ये मेरा प्रारंभिक विश्लेषण हैं, वास्तव में संख्या 6000 तक हो सकती है।
डॉ. वली ने कहा कि वे कडू कृषि कर रहे हैं, ये जंगल की खेती भी कहलाती है। चावल, गेहूं, दूध, मांसाहारी भोजन, असमय खाने की आदतें आदि कई बीमारियों की जड़ हैं। आयोजन में संस्थान के अध्य मसर्रर नूर खां, पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वीबी सिंह, पूर्व अध्यक्ष आरके त्रिवेदी समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। मानद सचिव डॉ. जसवंत सिंह की मौजूदगी में कार्यक्रम समाप्त हुआ।