लखनऊ। बंथरा में संपत्ति के लालच में रिश्तों का कत्ल करने की सनसनीखेज वारदात ने सबके दिल दहला दिए। यहां बृहस्पतिवार शाम गुंदौली गांव निवासी अजय सिंह ने एक बाग में पिता, भाई-भाभी और उनके दो मासूम बच्चों की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी। इसके बाद वह घर पहुंचा और दरवाजे पर बैठी मां का भी गला रेत दिया। इसके बाद खून से लथपथ हाल में थाने जाकर खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। हत्याकांड की जानकारी मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस आयुक्त समेत अन्य आला अधिकारी घटनास्थल पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि वारदात में अजय के साथ उसका बेटा अंकित भी शामिल था। पुलिस अजय से पूछताछ के साथ अंकित की तलाश कर रही है। पुलिस आयुक्त सुजीत पांडेय ने बताया कि वारदात शाम करीब साढ़े पांच बजे हुई। अजय का पिता, परिवार के सदस्यों से संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। शाम को अजय के 60 वर्षीय पिता अमर सिंह छोटे बेटे 40 वर्षीय अरुण, उसकी पत्नी रामसखी और नौ साल के बेटे सौरभ व दो साल की बेटी सारिका के साथ खेत में फसल काट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इसी दौरान अजय और अंकित बांका लेकर वहां पहुंचे और हमला बोल दिया। सभी जान बचाने को पास में प्रताप सिंह के बाग पहुंचे, जहां दोनों ने बांके से वार कर सबकी गर्दन काटकर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद दोनों अमर सिंह के घर पहुंचे और दरवाजे पर बैठी 58 साल की उनकी पत्नी राम दुलारी की गर्दन रेत दी। ग्रामीणों का कहना है कि अंकित भाग गया, जबकि अजय खून से सने कपड़े समेत थाना पहुंचा और खुद को पुलिस के हवाले कर दिए। उसने माता-पिता समेत छह की हत्या की जानकारी दी तो थाना के पुलिसकर्मियों के होश उड़ गए। उसे तुरंत हिरासत में लेकर इंस्पेक्टर ने आला अधिकारियों को सूचना दी। पुलिस आयुक्त, संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था नवीन अरोड़ा समेत अन्य अफसरों ने मौके पर पहुंचकर अजय से पूछताछ की। पुलिस आयुक्त ने बताया कि अमर सिंह ने तीन साल पहले घर के पास की खेती की जमीन बेची थी। इसमें उन्होंने अजय को फूटी कौड़ी नहीं दी। ऐसे में वह अपना हिस्सा मांग रहा था, पर अमर सिंह ने इससे इनकार कर दिया। इसे लेकर दोनों के बीच कई बार झगड़ा भी हो चुका था। अजय का पिता व परिवार के अन्य सदस्यों से रिश्ता काफी खराब था। ग्रामीणों ने बताया कि वह लगभग 20 साल से माता-पिता से अलग रह रहा था। ग्रामीणों ने बताया कि अजय और उसका बेटा अंकित पूरी तैयारी से आए थे। उनके पास बांका के अलावा तमंचे भी थे। ग्रामीणों ने प्रताप सिंह की बाग से गोलियां चलने की आवाजें भी सुनीं। हालांकि, देर रात तक मृतकों में से किसी को भी गोली लगने की बात सामने नहीं आई थी।