लखनऊ। लॉकडाउन के चलते अप्रैल माह में बिजली की मांग में 35 फीसदी की गिरावट आई है। उदाहरण के तौर पर वर्ष 2019 के 26 अप्रैल को बिजली की मांग 1127 मेगावाट थी जो इसी तारीख को वर्ष 2020 में घट कर 668 मेगावाट रह गई। यानी पिछले साल के सापेक्ष इस साल 26 अप्रैल को 459 मेगावाट बिजली की मांग घटी। इससे उद्यमियों एवं कारोबारियों के लगभग 100 करोड़ रुपये भी बचे, हालांकि लॉकडाउन के कारण उन्हें अन्य आर्थिक हानि झेलनी पड़ रही है। बिजली की मांग में ये गिरावट लॉकडाउन के दौरान लखनऊ की औद्योगिक इकाइयों, मॉल्स, बाजारों के बंद होने से आई है। मुख्य अभियंता लेसा (ट्रांस गोमती जोन) प्रदीप कक्कड़ के मुताबिक वर्ष 2019 के अप्रैल में 113 करोड़ रुपये की बिजली बेची थी। पर, लॉकडाउन के चलते इस साल अप्रैल में लगभग 70 करोड़ रुपये की ही बिजली बेच पाए। यानी 43 करोड़ रुपये की बिजली बिकने से बच गई। इसी प्रकार सिस गोमती जोन के मुख्य अभियंता मधुकर वर्मा ने बताया कि वर्ष 2019 के अप्रैल में लगभग 159 करोड़ रुपये की बिजली बेची थी। इस वर्ष अप्रैल में 102 करोड़ रुपये की बिजली बेच पाएंगे, जिससे 57 करोड़ रुपये की बिजली बच गई। इस प्रकार दोनो जोन औद्योगिक इकाई, बाजार व मॉल में बिजली का उपभोग नहीं हुआ तो 100 करोड़ रुपये की बिजली बची रह गई है।
-- 5000 औद्योगिक इकाइयां बंद
उद्यमी नेता शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक लखनऊ में लगभग 5000 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां बंद हैं, जिसमें 650 बड़ी औद्योगिक इकाइयां तो अमौसी, नादरगंज, सरोजनीनगर, तालकटोरा, कानपुर रोड, चिनहट, मोहनलालगंज में स्थित हैं। इन इकाइयों में 20 किलोवाट से एक हजार किलोवाट तक के बिजली कनेक्शन हैं। -
-
-- फैक्ट फाइल -
-कुल उपभोक्ता 8.50 लाख
घरेलू 6.25 लाख
अन्य 2.25 लाख -
- उद्योग, मॉल, बाजार बंद होने से बिजली खपत घटी
लॉकडाउन के दौरान उद्योग, बाजार व मॉल बंद होने से बिजली की खपत 35 फीसदी से अधिक घटी है। इससे लेसा के सिस जोन में वर्ष 2020 के अप्रैल माह मेें लगभग 57 करोड़ रुपये की बिजली बच गई है। - मधुकर वर्मा, मुख्य अभियंता लेसा (सिस गोमती)